नई दिल्लीः INX मीडिया रिश्वत कांड में गिरफ्तार पूर्व वित्त मंत्री के बेटे कार्ति चिदंबरम और इंद्राणी मुखर्जी से पूछताछ के बाद सीबीआई के सामने दो नए नाम आए हैं. इनमें से पहला नाम मिनिस्ट्री ऑफ फाइनेंस में तत्कालीन ब्यूरोक्रेट का है. सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार इस अधिकारी को संबंधित मंत्रालय के कई अहम दस्तावेजों की जानकारी थी. यह अधिकारी दूसरे आला अधिकारियों के करीब बताया जा रहा है. जबकि दूसरा नाम दिल्ली के एक लॉबिस्ट का है जो राजनीतिक गलियारों में मशहूर होने के साथ-साथ दिल्ली-मुंबई में होने वाली पार्टियों में शामिल होता है. हालांकि सूत्रों का कहना है कि कार्ति चिदंबरम ने इंद्राणी के इस दावे को भी खारिज कर दिया. हालांकि बताया जा रहा है कि सीबीआई INX Media केस में इन दोनों की भूमिका की जांच कर सकती है.

गौरतलब है कि कार्ति को चेन्नई एयरपोर्ट से उस समय गिरफ्तार किया गया था जब वह लंदन से लौटे थे. इसके बाद सीबीआई की अदालत ने एक मार्च को कार्ति चिदंबरम को छह मार्च तक के लिए हिरासत में भेज दिया था. आरोप है कि कार्ति ने 2007 में विदेशी निवेश प्रमोशन बोर्ड (एफआईपीबी) से निवेश के लिए मंजूरी दिलाने के लिए मुंबई की आईएनएक्स मीडिया से 3.5 करोड़ रुपए की घूस ली थी.

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आईएनएक्स मीडिया का नाम बदलकर अब 9एक्स मीडिया हो गया है और उस समय इसका संचालन पीटर और इंद्राणी मुखर्जी करते थे, दोनों ही शीना बोरा हत्याकांड में आरोपी हैं. इस मामले में आरोपी इंद्राणी ने एक मजिस्ट्रेट के सामने कहा था कि कार्ति उनसे दिल्ली के एक होटल में मिला था और एफआईपीबी मंजूरी के लिए 10 लाख डॉलर की मांग की थी.

गिरफ्तारी के वक्त क्या कहा था सीबीआई ने
कार्ति की गिरफ्तारी के बाद सीबीआई ने कहा था कि कार्ति पूछताछ में सवालों के जवाब नहीं दे रहे थे. साथ ही वे जांच में सहयोग भी नहीं कर रहे थे. सीबीआई ने यह भी जानकारी दी है कि कार्ति लंदन में प्रवास के दौरान अपने खिलाफ चल रही जांच के सबूतों को खत्म कर रहे थे. जांच एजेंसी ने इससे पहले पूछताछ के लिये कार्ति को समन किया था लेकिन इससे बचने के लिये उन्होंने कई अदालतों से स्थगनादेश ले लिया था

कार्ति से कई बार पूछताछ कर चुकी है सीबीआई
सीबीआई ने 15 मई 2017 को मामले में एफआईआर दर्ज की सीबीआई और ईडी ने पी चिदंबरम और उनके बेटे कार्ति के स्वामित्व वाले घरों और दफ्तरों पर कई बार छापे मारे प्रवर्तन निदेशालय की टीम ने कार्ति चिदंबरम से इस मामले में कई बार पूछताछ की.

क्या हैं आरोप
2007 में पी. चिदंबरम के वित्त मंत्री रहने के दौरान आईएनएक्स मीडिया को विदेशों से 305 करोड़ रुपए की रकम प्राप्त करने के लिए एफआईपीबी मंजूरी मिलने में अनियमितताएं बरती गईं. यह भी आरोप है कि एफआईपीबी मंजूरी दिलवाने में मामले में कार्ति को 10 लाख रुपए मिला था. सीबीआई का आरोप है कि कार्ति ने टैक्‍स जांच को टालने के लिए आईएनएक्स मीडिया से धन भी लिया था. आईएनएक्स मीडिया को मंजूरी दिलाते वक्त इस कंपनी के मालिक पीटर और इंद्राणी मुखर्जी थे.