नई दिल्ली: दिल्ली उच्च न्यायालय ने अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक से गुरुवार को ही एक मेडिकल बोर्ड का गठन करके पूर्व केन्द्रीय मंत्री पी चिदंबरम के स्वास्थ्य पर जानकारी देने के लिए कहा है. चिदंबरम आंतों से जुड़ी बीमारी ‘क्रोहन’ से पीड़ित हैं. उच्च न्यायालय ने कहा कि चिदंबरम के स्वास्थ्य की जानकारी देने वाले मेडिकल बोर्ड में हैदराबाद के गैस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट नागेश्वर रेड्डी को शामिल किया जाए. रेड्डी 74 वर्षीय चिदंबरम का उपचार कर रहे हैं. Also Read - 35 doctors at Delhi AIIMS test Covid-19 positive: गंगाराम के बाद एम्स के 35 डॉक्टर कोरोना पॉजिटिव

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आईएनएक्स मीडिया धन शोधन मामले में चिदंबरम फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद हैं. प्रवर्तन निदेशालय द्वारा दर्ज आईएनएक्स मीडिया धनशोधन मामले में चिदंबरम ने अदालत से चिकित्सकीय आधार पर अंतरिम जमानत देने का अनुरोध किया है. चिदंबरम ने कहा है कि उनकी सेहत खराब हो रही है और उन्हें संक्रमण रहित वातावरण में रहने की जरूरत है. न्यायमूर्ति सुरेश कैत ने कहा कि बोर्ड आज (गुरुवार को) चिदंबरम की चिकित्सीय अवस्था के बारे में चर्चा करेगा और इसकी रिपोर्ट अदालत के समक्ष रखेगा. इसके बाद उच्च न्यायालय इस मामले पर शुक्रवार को सुनवाई करेगा. चिदंबरम ने छह दिन के लिए अंतरिम राहत मांगी थी जिससे कि वह हैदराबाद में एशियन इंस्टीट्यूट ऑफ गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी में अपने चिकित्सक रेड्डी से जांच करवा सकें और परामर्श ले सकें. उन्होंने कहा कि उन्हें वर्ष 2017 में क्रोहन रोग का पता चला था और इस वर्ष पांच अक्टूबर से उन्हें पेट में लगातार बहुत अधिक दर्द बना हुआ है जिसके लिए तत्काल चिकित्सीय उपचार की आवश्यकता है. क्रोहन आंतों से जुड़ी एक बीमारी है. इसके लक्षणों में पेट में दर्द, दस्त और वजन घटना शामिल है.

चिदंबरम का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पहले कहा था कि कांग्रेस के नेता को उपचार के लिए हैदराबाद ले जाना होगा जिसका खर्च वह खुद वहन करेंगे. उन्होंने यह भी कहा था कि वह जिस रोग से ग्रसित हैं उसमें उन्हें संक्रमण रहित वातावरण में रहना होगा. बाद में उन्होंने कहा था कि चिदंबरम को या तो अपोलो अस्पताल में भर्ती करवाया जाए या फिर रेड्डी को यहां बुलाया जाए. चिदंबरम की ओर से पेश एक और वरिष्ठ अधिवक्ता एएम सिंघवी ने कहा कि उनके मुवक्किल का वजन 73 किलो से घटकर 66 किलो रह गया है. यह दिखाता है कि हिरासत में उनकी हालत खराब हुई है. अदालत और सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि जरूरत पड़ती है तो चिदंबरम को उपचार के लिए एम्स के निजी वार्ड में भर्ती करवाया जा सकता है क्योंकि इस अग्रणी संस्थान में सर्वश्रेष्ठ चिकित्सक हैं. विधिक अधिकारी ने कहा कि उपचार पर कोई आपत्ति नहीं उठाई जा सकती है और हर आरोपी को अच्छे से अच्छा उपचार दिया जाना चाहिए. मेहता ने कहा कि चिदंबरम को यह रोग पहले से है, यह रोग बढ़ गया है और एम्स का सर्वश्रेष्ठ दल उनका उपचार कर रहा है. जब सिब्बल ने जोर देकर यह कहा कि चिदंबरम को तिहाड़ जेल से एम्स के निजी वार्ड में आज ही ले जाया जाए तो मेहता ने कहा कि चिकित्सकों ने बुधवार को ही उनकी जांच की है और उन्होंने चिदंबरम को अस्पताल में भर्ती करवाने जैसी कोई सलाह नहीं दी है.

इस पर सिब्बल ने कहा कि वह याचिका वापस ले रहे हैं और उन्हें कुछ नहीं चाहिए क्योंकि वह तो यह देखकर हैरान हैं कि यह सरकार एक व्यक्ति को संक्रमण रहित माहौल तक नहीं देना चाहती. इस पर न्यायाधीश ने नाराजगी जताई और कहा कि याचिका वापस ली गई मानकर खारिज की जाती है.’’ उन्होंने आगे कहा कि यह रवैया ठीक नहीं है. इस कद का अधिवक्ता इस तरह का व्यवहार कर रहा है. बाद में चिदंबरम की ओर से पेश एक अन्य अधिवक्ता ने माहौल को थोड़ा संभालने का प्रयास करते हुए अदालत से कहा कि इस मामले में आदेश पारित किया जा सकता है. इसके बाद अदालत ने अपने आदेश में एम्स के मेडिकल बोर्ड को निर्देश दिया कि वह चिदंबरम की सेहत के बारे में अपनी राय दें, खासतौर पर इस बारे में कि उन्हें अस्पताल के संक्रमण रहित माहौल में प्रवेश देने की जरूरत है या नहीं. अदालत ने एम्स के निदेशक को कहा कि वह शाम चार बजे तक एक बोर्ड का गठन करें और चिकित्सकों के उस दल में रेड्डी को शामिल करें. अदालत ने यह साफ कर दिया कि बोर्ड सात बजे एकत्रित होगा और यदि तब तक रेड्डी हैदराबाद से वहां नहीं पहुंचते हैं तो बोर्ड शुक्रवार सुबह दस बजे फिर बैठेगा और अपनी राय देगा.

चिदंबरम की लंबित जमानत याचिका पर चार नवंबर को सुनवाई होनी है. यह अंतरिम जमानत अर्जी उसी में जोड़ी गई है. अंतरिम जमानत याचिका के मुताबिक सात अक्टूबर को एम्स में उनकी जांच हुई थी, जिसमें उन्हें एंटीबायोटिक और पेन किलर दिए गए. इसके बाद उनका दर्द कम हुआ. इसके बाद 22 अक्टूबर को उन्हें फिर समस्या हुई, 23 अक्टूबर को एम्स में उनकी जांच हुई और उन्हें नयी दवाइयां दी गईं. लेकिन उसके बाद दर्द में राहत नहीं मिली. इसमें यह भी कहा गया कि उनकी मेडिकल रिपोर्ट उनके अपने चिकित्सक को भेजी गई और उन्होंने कहा कि समस्या बढ़ गई है और चिदंबरम को संक्रमण रहित माहौल में उपचार देना होगा.