नई दिल्लीः पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के चहेते पुलिस अधिकारी राजीव कुमार को सुप्रीम कोर्ट से तगड़ा झटका लगा है. करोड़ों रुपये के सारदा चिटफंड घोटाला मामले में गिरफ्तारी से राहत बढ़ाने की मांग करने वाली उनकी याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया है. कोलकाता के पुलिस प्रमुख रह चुके राजीव कुमार, ममता बनर्जी के चहेते होने के कारण इन दिनों काफी चर्चा में हैं. Also Read - नारद मामले में ममता बनर्जी, घटक की याचिकाओं पर सुनवाई से अलग हुए सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश

कोर्ट ने कुमार को एक सप्ताह के लिए गिरफ्तारी से राहत प्रदान की थी जिसकी समयावधि आज शुक्रवार को समाप्त हो गई. जस्टिस अरुण मिश्रा की अवकाशकालीन पीठ ने कुमार के वकील सुनील फर्नांडिस से कहा कि कुमार राहत पाने के लिए निचली अदालत अथवा कलकत्ता हाईकोर्ट का रुख कर सकते हैं. जब फर्नांडिस ने कहा कि कोलकाता में वकीलों की हड़ताल के कारण अदालतें काम नहीं कर रही हैं तो सर्वोच्च अदालत ने कहा कि आप गलत हैं, अदालतें वहां काम कर रही हैं. सभी न्यायाधीश अदालतों में हैं और वे वाद सुन रहे हैं. आपके मुवक्किल पूर्व पुलिस आयुक्त हैं और वह कई युवा अधिवक्ताओं से कानून को बेहतर जानते हैं. वह स्वयं वहां अदालतों में जा सकते हैं. Also Read - यूपी से नदी में बहकर बंगाल आ रहे शव, हमारी सरकार कर रही अंतिम संस्कार: ममता बनर्जी

पीठ ने यह भी कहा कि कुमार की नई याचिका उसके समक्ष गलत तरह से सूचीबद्ध हो गई है क्योंकि प्रधान न्यायाधीश इस मामले में पहले ही आदेश जारी कर चुके हैं. फर्नांडिस ने अदालत से कहा कि वे प्रधान न्यायाधीश के पास जा सकते हैं पर समस्या यह है कि कुमार को गिरफ्तारी से दिये गए संरक्षण की अवधि आज समाप्त हो रही है. Also Read - इस राज्य में 32 हजार शिक्षकों की होगी नियुक्ति, सरकार का बड़ा फैसला

इस पर पीठ ने कहा, ‘क्या किया जा सकता है? क्या हमारे पास इसे सुनने का क्षेत्राधिकार है? आपकी समस्या कुछ हो सकती है लेकिन आपकी याचिका अनुच्छेद 32 के तहत विचार योग्य नहीं है.’ गौरतलब है कि गत 17 मई को तीन न्यायधीशों की पीठ की अध्यक्षता कर रहे प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने कुमार को अपने पांच फरवरी के आदेश के जरिये गिरफ्तारी से दिया संरक्षण वापस ले लिया था. हालांकि, अदालत ने उन्हें राहत प्रदान करते हुये समुचित अदालत के पास जाने के लिए एक सप्ताह का और संरक्षण प्रदान कर दिया था. कुमार ने 20 मई को एक बार फिर उच्चतम न्यायालय का रुख करके कहा कि इस सात दिन की अवधि को इसलिए और बढ़ाया जाए क्योंकि कोलकाता में वकीलों की हड़ताल चल रही है.