जंग की मार! LPG की किल्लत के बाद ...अब दवाएं भी हो सकती है महंगी, जानिए पूरी डिटेल

Written By: Rishabh Kumar Updated by: Rishabh Kumar
Updated Date:March 18, 2026 8:22 PM IST

Iran Israel War: ईरान, इज़राइल और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव का असर अब भारत पर भी दिखने लगा है. ऐसा माना जा रहा है कि इस संघर्ष की वजह से आने वाले समय में देश में दवाओं के दाम बढ़ सकते हैं.

Iran Israel War: ईरान, इजराइल और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव का असर अब भारत पर भी दिखने लगा है. खासकर दवाइयों की सप्लाई पर इसका असर पड़ रहा है. दवा कारोबार से जुड़े लोगों का कहना है कि आने वाले समय में दवाओं की कीमतें बढ़ सकती हैं. अभी से थोक बाजार में इसका असर दिखाई देने लगा है, जिससे चिंता बढ़ गई है कि अगर हालात ऐसे ही रहे तो आम लोगों को महंगी दवाइयों का सामना करना पड़ सकता है. इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, दवाओं के उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले कच्चे माल की लागत बढ़ रही है.इसका सीधा असर बाजार पर पड़ रहा है और धीरे-धीरे यह असर ग्राहकों तक भी पहुंच सकता है. ऐसे में माना जा रहा है कि LPG की किल्लत के बाद लोगों को महंगाई का मार भी झेलना पड़ सकता है.

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पैकेजिंग हुई महंगी

दवाइयों को बनाने के लिए जरूरी कच्चा माल ज्यादातर विदेशों से आयात किया जाता है. तनाव के कारण इन चीजों की कीमतें बढ़ गई हैं. एल्यूमिनियम और प्लास्टिक जैसे मटेरियल महंगे हो गए हैं, जिनका इस्तेमाल दवाओं की पैकेजिंग में होता है. जब पैकेजिंग महंगी होती है, तो दवाओं की कुल लागत भी बढ़ जाती है. इसका असर सीधे दवाओं की कीमतों पर पड़ता है.

आम इस्तेमाल की दवाओं पर असर

यह असर सिर्फ खास या महंगी दवाओं तक सीमित नहीं है. रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली दवाएं जैसे पैरासिटामोल, अमॉक्सिसिलिन, मेटफॉर्मिन और एज़िथ्रोमाइसिन भी प्रभावित हो सकती हैं. ये दवाएं बुखार, डायबिटीज, इंफेक्शन और सांस से जुड़ी बीमारियों में दी जाती हैं. देश में लाखों लोग रोज इन दवाओं का उपयोग करते हैं, इसलिए इनके दाम बढ़ने या कमी होने का सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा.

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स्टॉक है, लेकिन आगे चिंता

फिलहाल बाजार में दवाओं का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है, जिससे तुरंत कोई बड़ी परेशानी नहीं है. लेकिन व्यापारियों का कहना है कि अगर हालात नहीं सुधरे, तो आने वाले दिनों में दिक्कत बढ़ सकती है. फार्मा कंपनियों ने भी सरकार को इस बारे में जानकारी दी है और कच्चे माल की सप्लाई को लेकर चिंता जताई है. अगर वैश्विक स्तर पर तनाव जारी रहता है, तो दवाओं की उपलब्धता और कीमत दोनों पर दबाव बढ़ सकता है.

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