ईरान-इजरायल जंग का सबसे ज्यादा असर LPG पर ही क्यों? पेट्रोल-डीजल की कमी से कैसे निपटता है भारत- Explained
LPG Crisis: एलपीजी के मुकाबले भारत कच्चा तेल 40 से ज्यादा देशों से इंपोर्ट करता है. रूस से आने वाले कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा उन रास्तों से भारत पहुंचता है जो होर्मुज से होकर नहीं गुजरते.
Iran Israel war impact
Iran Israel War: मिडिल ईस्ट में चल रहे जंग के बीच भारत की LPG सप्लाई चेन प्रभावित हुई है. गैस एजेंसियों के बाहर लंबी-लंबी कतारें लगी हैं. दर्जनों रेस्टोरेंट और ढाबे बंद हो गए हैं. लोगों को LPG रिफिल के लिए कई दिनों तक इंतजार करना पड़ रहा है. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज (दुनिया के सबसे अहम एनर्जी शिपिंग रास्तों में से एक) से जहाजों की आवाजाही ठप हो गई है. ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों और उसके जवाब में तेहरान की जवाबी कार्रवाई ने मध्य-पूर्व में समुद्री यातायात को बाधित कर दिया है. यह क्षेत्र जीवाश्म ईंधन का एक बड़ा निर्यातक है. भारत भी इस क्षेत्र से होने वाले एनर्जी आयात पर निर्भर है तो फिर LPG की सप्लाई में सबसे पहले असर क्यों दिख रहा है,जबकि पेट्रोल-डीजल को लेकर फिलहाल कोई मारामारी नहीं है? पेट्रोल-डीजल जैसे पेट्रोलियम ईंधन (जो इसी क्षेत्र से आते हैं) वे भारतीय खुदरा बाजारों में आसानी से उपलब्ध क्यों हैं?
गैस की किल्लत का दिख रहा असर
9 मार्च से LPG गैस सिलेंडरों की मारामारी देखी जा रही थी, वह अब कई गुना बढ़ गई है. 12 मार्च से कुछ CNG, डीजल और पेट्रोल पंप पर लगी लंबी कतारों में यह डर साफ दिखाई दे रहा. हालांकि ऐसी तस्वीरें बहुत कम जगहों से आईं. सरकार ने साफ किया है कि पेट्रोलियम ईंधन की पर्याप्त सप्लाई है, जिसे रिफाइन करके पेट्रोल-डीजल बनाया जाता है. LPG के मामले में भी, सरकार ने साफ किया है कि घरेलू सेक्टर में सप्लाई में कोई रुकावट नहीं आएगी. घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने के लिए कमर्शियल LPG सिलेंडरों की बिक्री रोक दी गई है. इस वजह से ब्लैक मार्केट में LPG रिफिल की कीमतें आसमान छू रही हैं. कई खाने-पीने की दुकानें बंद हो गई हैं.
LPG सप्लाई के लिए होर्मुज स्ट्रेट कितना जिम्मेदार?
पेट्रोलियम मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, भारत हर साल 31 मिलियन टन से ज्यादा LPG की खपत करता है. घरेलू उत्पादन से इस मांग का आधे से भी कम हिस्सा पूरा हो पाता है. बाकी की जरूरत सऊदी अरब, कतर, UAE और कुवैत जैसे खाड़ी देशों से आयात करके पूरी की जाती है. इसलिए, इस ईंधन को लेकर आने वाले टैंकरों को भारत पहुंचने से पहले होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) से होकर गुजरना पड़ता है. भारत की LPG खेप का एक बहुत बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है. रिपोर्ट के मुताबिक, भारत आने वाली लगभग 80-90% LPG खेप 'होर्मुज़ स्ट्रेट' से होकर गुजरती है.
कच्चे तेल की सप्लाई किन-किन देशों से होती है?
कच्चे तेल की सप्लाई और रिफाइनिंग, LPG की सप्लाई के मुकाबले थोड़ी ज्यादा अलग-अलग जगहों से होती है. भारत 40 से ज्यादा देशों से कच्चा तेल इंपोर्ट करता है. हाल के सालों में रूस सबसे बड़ा सप्लायर बनकर उभरा है. रूस के बाद इराक और सऊदी अरब का नंबर आता है. रूस से आने वाले कच्चे तेल का एक बड़ा हिस्सा उन रास्तों से भारत पहुंचता है जो होर्मुज से होकर नहीं गुजरते. पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भारत का 70% कच्चा तेल इंपोर्ट अब होर्मुज स्ट्रेट के अलग से आता है.
भारत ने हाल ही में खरीदा 30 मिलियन बैरल कच्चा तेल
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका की तरफ से 30 दिनों की छूट दिए जाने के बाद भारत ने हाल ही में रूस से 30 मिलियन बैरल कच्चा तेल खरीदा. इस छूट के तहत भारत को समुद्र में फंसे हुए तेल के जहाजों से तेल खरीदने की इजाजत मिली थी. कच्चा तेल पहुंचने के बाद, भारतीय रिफाइनरियां उसे पेट्रोल, डीजल और दूसरे ईंधनों में बदल देती हैं. देश के पास घरेलू मांग के मुकाबले रिफाइनिंग की ज्यादा क्षमता भी है. इससे रिफाइनरियों को कुछ लचीलापन मिलता है, जिससे वे सप्लाई के पैटर्न बदलने पर उत्पादन को जरूरत के हिसाब से कम-ज्यादा कर सकती हैं. इसके अलावा एक और अहम फ़र्क भी है.
भारत के पास बड़ा स्ट्रैटेजिक भंडार
भारत कच्चे तेल के लिए रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार बनाए रखता है. ये जमीन के नीचे बने स्टोरेज सेंटर अचानक सप्लाई में आने वाली रुकावटों से निपटने के लिए बनाए गए हैं. भारत इमजरजेंसी स्थितियों के लिए विशाखापत्तनम, मैंगलोर और पादुर में जमीन के नीचे बनी चट्टानी गुफाओं में कच्चा तेल जमा करके रखता है. रिफाइनरियों और तेल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के पास मौजूद कमर्शियल स्टॉक के साथ मिलकर, ये भंडार कई हफ्तों की खपत को पूरा कर सकते हैं. यह बफर भारतीय फ्यूल स्टेशनों पर पेट्रोल और डीजल की किसी भी अचानक कमी को टाल देता है.
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भारत के पास LPG स्टोर करने की कितनी क्षमता?
कच्चे तेल के विपरीत, भारत के पास LPG को स्टोर करने की क्षमता सीमित है. भारत कच्चे तेल के भंडार की तरह LPG का कोई बड़ा रणनीतिक भंडार नहीं रखता है. इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी (IEA) के मुताबिक, भारत के पास मंगलुरु और विशाखापत्तनम में LPG केवर्न हैं, लेकिन उनकी कुल क्षमता 1.4 लाख टन है, जो दो दिन से भी कम की खपत के बराबर है. भारत का गैस सिस्टम स्टॉक जमा करने के बजाय लगातार सप्लाई के लिए डिजाइन किया गया है. अपनी 'इंडिया गैस मार्केट रिपोर्ट-आउटलुक टू 2030' में, IEA ने बताया कि देश में अभी अंडरग्राउंड गैस स्टोरेज की सुविधाएं नहीं हैं और LNG को स्टोर करने की क्षमता भी सीमित है, जो लगभग 1.9 bcm है. रणनीतिक गैस भंडार बनाने के प्रस्ताव अभी भी फिजिबिलिटी (संभाव्यता) के चरण में हैं.
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IEA ने फरवरी 2025 की रिपोर्ट में बताया, 'शुरुआती तौर पर 4 bcm (Billion Cubic Metres) तक की अंडरग्राउंड गैस स्टोरेज क्षमता बनाने में $1-2 बिलियन का खर्च आने का अनुमान है और प्रोजेक्ट को मंजूरी मिलने के बाद इसके निर्माण में 3-4 साल लगने की उम्मीद है.' स्टोरेज LPG टर्मिनल और बॉटलिंग प्लांट मुख्य रूप से रोजाना की सप्लाई साइकिल को संभालते हैं. एक और वजह यह है कि पिछले एक दशक में केंद्र सरकार की योजनाओं के चलते LPG सिलेंडरों की मांग में भी जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है.
देश में LPG कनेक्शन में भारी इजाफा
केंद्र सरकार की 'प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना' ने लाखों ग्रामीण परिवारों तक कुकिंग गैस की पहुंच बढ़ाई है. इसके परिणामस्वरूप, पूरे देश में LPG कनेक्शनों की संख्या 33 करोड़ के पार पहुंच गई है. पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल के आंकड़ों के मुताबिक, ये कनेक्शन 2010 में लगभग 10.6 करोड़ से बढ़कर 2014 में 14.5 करोड़ हो गए और फिर 2018 में 22.4 करोड़ से बढ़कर 2025 तक लगभग 33 करोड़ तक पहुंच गए.
LPG की किल्लत कैसे दूर कर रही सरकार?
केंद्र सरकार और गैस कंपनियों ने LPG की उपलब्धता को स्थिर करने के लिए इमरजेंसी उपाय करने शुरू कर दिए हैं. रिफाइनरियों से कहा गया है कि वे कच्चे तेल की प्रोसेसिंग से ज्यादा से ज्यादा LPG निकालें. प्रोपेन और ब्यूटेन जैसे कुछ पेट्रोकेमिकल फीडस्टॉक स्ट्रीम को भी, ज्यादा कुकिंग गैस बनाने के लिए, कुछ समय के लिए दूसरी तरफ मोड़ा जा रहा है. सरकार खाड़ी देशों के बाहर के सप्लायरों से भी अतिरिक्त खेप (cargoes) मंगाने पर विचार कर रही है, जिनमें अमेरिका और पश्चिम अफ्रीका शामिल हैं. हालांकि, इन खेपों को पहुंचने में ज्यादा समय लगेगा और इनकी कीमत भी ज्यादा हो सकती है. इसलिए, कमर्शियल इस्तेमाल के बजाय घरेलू इस्तेमाल को प्राथमिकता दी जा रही है.
केंद्र सरकार ने बताया कि फिलहाल, डीजल और पेट्रोल पंपों पर स्टॉक की कोई कमी नहीं है, लेकिन गैस एजेंसियों के बाहर सिलेंडरों के लिए लगी लंबी कतारें दिख रही हैं.
FAQ
- पेट्रोल-डीजल की बजाय सबसे ज्यादा असर LPG पर क्यों पड़ा?
LPG का ज्यादातर आयात खाड़ी देशों से होता है. इनमें से ज्यादातर सप्लाई होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरती है.
- भारत आने वाली LPG सप्लाई के लिए होर्मुज स्ट्रेट पर कितना निर्भर भारत?
भारत आने वाली LPG खेप का लगभग 80-90% हिस्सा'होर्मुज़ स्ट्रेट'से गुजरता है.
- LPG की सप्लाई प्रभावित होने की क्या वजह है?
बीते दशक में LPG कनेक्शनों की संख्या में जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है और भारत में नैचुरल गैस स्टोर करने के लिए रिजर्व की मात्रा सीमित है.
- पेट्रोल-डीजल की सप्लाई पर असर क्यों नहीं?
पेट्रोल और डीजल कच्चे तेल से बनते हैं, जिसे भारत कई अलग-अलग देशों से खरीदता है.
- भारत के पास कच्चे तेल का कितना रिजर्व?
नैचुरल गैस के मुकाबले भारत कच्चे तेल का ज्यादा बड़ा रिजर्व रखता है. यह बफर पेट्रोल-डीजल पर पड़ने वाले तत्काल असर को कुछ समय के लिए टाल देता है.
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