अमेरिका से समझौते पर पहले था ऐतराज, लेकिन फिर मानी बात; ईरान के सुप्रीम लीडर का बड़ा खुलासा

Written By: Tanuja Joshi Updated by: Tanuja Joshi
Updated Date:June 18, 2026 11:44 PM IST

ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने खुलासा किया कि अमेरिका के साथ हुए समझौते पर उन्हें शुरुआती आपत्तियां थीं. हालांकि राष्ट्रपति और सुरक्षा परिषद के भरोसे के बाद उन्होंने मंजूरी दी, साथ ही चेतावनी दी कि ईरान अपने हितों से समझौता नहीं करेगा.

ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते कूटनीतिक संपर्कों के बीच एक महत्वपूर्ण खुलासा सामने आया है. ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने स्वीकार किया है कि अमेरिका के साथ हुए हालिया समझौता ज्ञापन (MoU) को लेकर उनके मन में शुरुआत में कई संदेह और आपत्तियां थीं. हालांकि, बाद में राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों की तरफ दिए गए भरोसे के बाद उन्होंने इस समझौते को मंजूरी देने का फैसला किया.

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गुरुवार (18 जून) को जारी एक लिखित संदेश में खामेनेई ने कहा कि उन्होंने ये अनुमति इसलिए दी क्योंकि उन्हें विश्वास दिलाया गया कि समझौते के दौरान ईरान के राष्ट्रीय हितों, संप्रभुता और क्षेत्रीय सहयोगियों के हितों की पूरी तरह रक्षा की जाएगी. उन्होंने कहा कि सरकार और सुरक्षा परिषद के सदस्यों ने आश्वासन दिया कि किसी भी परिस्थिति में देश के मूल हितों से समझौता नहीं किया जाएगा.

शुरुआत में थे गंभीर मतभेद

खामेनेई ने अपने संदेश में संकेत दिया कि अमेरिका के साथ किसी भी प्रकार की नई समझ को लेकर उनका दृष्टिकोण सरकार से अलग था. उनका मानना था कि वाशिंगटन के साथ बातचीत में सतर्कता बरतना बेहद जरूरी है. लेकिन जब उन्हें यह भरोसा मिला कि बातचीत की प्रक्रिया ईरान की शर्तों और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को ध्यान में रखकर आगे बढ़ेगी, तब उन्होंने इस समझौते को आगे बढ़ाने की अनुमति दी.

उनकी ये टिप्पणी ऐसे समय आई है जब ईरान और अमेरिका के बीच 60 दिनों की वार्ता अवधि शुरू होने जा रही है. इस दौरान दोनों देश कई संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा कर सकते हैं, जिनमें क्षेत्रीय सुरक्षा, प्रतिबंधों से जुड़े विषय और अन्य रणनीतिक मुद्दे शामिल हैं. सर्वोच्च नेता ने अपने संदेश में ये भी स्पष्ट कर दिया कि बातचीत में शामिल होना किसी भी तरह से अमेरिकी दृष्टिकोण को स्वीकार करना नहीं माना जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि बातचीत का उद्देश्य अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना है, न कि दूसरे पक्ष की शर्तों को मान लेना.

खामेनेई ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर अमेरिका अत्यधिक दबाव बनाने या अतिरिक्त मांगें थोपने की कोशिश करता है, तो ईरान उन्हें स्वीकार नहीं करेगा. ये बयान उन आलोचकों को जवाब माना जा रहा है जो अमेरिका के साथ किसी भी प्रकार की बातचीत का विरोध करते रहे हैं.

ये बयान यह भी दर्शाता है कि ईरानी नेतृत्व अमेरिका के साथ संवाद के लिए तैयार तो है, लेकिन वह किसी भी स्थिति में अपनी रणनीतिक सीमाओं और राष्ट्रीय हितों को पीछे नहीं छोड़ना चाहता. आने वाले सप्ताहों में दोनों देशों के बीच होने वाली वार्ताएं पश्चिम एशिया की राजनीति और वैश्विक कूटनीति पर बड़ा प्रभाव डाल सकती हैं.

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