नई दिल्लीः लॉकडउन (Lockdown4.0) के बीच कई प्रवासी मजदूर अपने-अपने घर-परिवार से दूर अन्य राज्यों और शहरों में फंसे हुए हैं. ऐसे में भारतीय रेलवे(Indian Railway) बीते 1 मई से श्रमिक स्पेशल ट्रेनों (Shramik Special Trains) के जरिए इन मजदूरों को उनके घरों तक पहुंचाने में जुटी है. लेकिन, इन सबके बाद भी श्रमिकों को काफी समस्याओं से गुजरना पड़ रहा है और ये ट्रेनें मजदूरों के लिए कम पड़ रही हैं. ऐसे में भारतीय रेलवे ने दूसरे राज्यों और शहरों में फंसे लोगों को उनके घरों तक पहुंचाने के लिए 10 दिनों के लिए खास प्लान तैयार किया है. दरअसल, रेलवे ने मांग को ध्यान में रखते हुए अगले 10 दिनों में 2600 ट्रेनें चलाने का फैसला किया है. Also Read - चीन में फैली एक और बीमारी! अब मंडराया मानव प्लेग महामारी फैलने का खतरा

भारतीय रेलवे द्वारा चलाई जा रही इन ट्रेनों के जरिए करीब 36 लाख प्रवासी मजदूरों को उनके घरों तक पहुंचाया जाना है. बता दें रेलवे का दावा है कि अभी तक करीब 50 लाख से अधिक लोगों को उनके घरों तक पहुंचाया है. रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष वीके यादव ने शनिवार को एक वार्ता के दौरान इस बात की जानकारी देते हुए बताया कि, ‘रेलवे ने सभी जिलों के जिलाधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने-अपने जिलों से फंसे श्रमिकों की संख्या के हिसाब से जरूरत के मुताबिक भारतीय रेलवे को इसकी जानकारी दें और श्रमिक स्पेशल गाड़ियों की मांग करें.’ Also Read - Covid-19: रूस को पीछे छोड़ दुनिया में कोरोना से तीसरा सबसे ज्यादा प्रभावित देश बना भारत

बता दें करीब 200 ट्रेनों को 2 जून से रेलवे ने चलाने का फैसला किया है. ऐसे में सोशल डिस्टेंसिंग को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने पहले ही अनारक्षित टिकटों पर यात्रा करने पर पूर्णतः प्रतिबंद लगा दिया है. यही नहीं आरक्षित टिकटों को लेकर भी रेलवे ने कई नियम बनाए हैं और साथ ही लगातार लोगों तक अलर्ट के जरिए इस बात की भी जानकारी पहुंचा रही है कि उन्हें यात्रा में क्या सुविधाएं मिलेंगी और क्या नहीं. और यात्रियों को यात्रा के दौरान किन-किन बातों का ध्यान रखना है, इसकी जानकारी भी रेलवे अलर्ट के जरिए यात्रियों तक पहुंचा रही है. Also Read - दिल्ली में सोमवार से खुलेंगे ऐतिहासिक स्मारक, लेना होगा ऑनलाइन टिकट