नई दिल्ली: आईआरसीटीसी की दिल्ली-लखनऊ तेजस एक्सप्रेस के यात्रियों को ट्रेन के विलंब होने पर मुआवजा दिया जाएगा. रेलवे की सहायक कंपनी ने मंगलवार को यह जानकारी दी. यह इस तरह की पहली घोषणा है. आईआरसीटीसी ने अपनी पहली ट्रेन की शुरुआत से पहले कहा कि एक घंटे से अधिक का विलंब होने पर 100 रुपये की राशि अदा की जाएगी जबकि दो घंटे से अधिक की देरी होने पर 250 रुपए का मुआवजा दिया जाएगा.

इसके अतिरिक्त आईआरसीटीसी की इस पहली ट्रेन के यात्रियों को 25 लाख रुपए का नि:शुल्क बीमा भी दिया जाएगा.यात्रा के दौरान लूटपाट या सामान चोरी होने की स्थिति में भी एक लाख रुपए के मुआवजे की व्यवस्था है. ट्रेन में सफर कर रहे लोगों के लिए इस तरह की यह पहली व्यवस्था होगी. ट्रेन को चार अक्टूबर को हरी झंडी दिखाई जाएगी. इसका पहला व्यावसायिक परिचालन पांच अक्टूबर को होगा.

कई देशों में ट्रेन में देरी होने पर यात्रियों को आर्थिक या इस तरह का मुआवजा देने की व्यवस्था है. जापान जैसे देशों में और पेरिस जैसे शहरों में रेलवे कंपनियां यात्रियों को साक्ष्य के रूप में विलंब प्रमाणपत्र देती हैं. इस प्रमाणपत्र को ट्रेन के देरी से पहुंचने के कारण विश्वविद्यालय की परीक्षाओं में देरी से पहुंचने पर दिखाया जा सकता है.

पांच मिनट की देरी होने पर भी प्रमाणपत्र जारी किया जाता है. ब्रिटेन में रेल यात्रियों को विलंब होने पर स्वत: ही मुआवजा मिल जाता है. हालांकि स्पष्ट नहीं है कि आईआरसीटीसी मुआवजे की राशि कैसे बांटेगा. नयी तेजस एक्सप्रेस सप्ताह में छह दिन नयी दिल्ली-लखनऊ मार्ग पर चलेगी.

इसमें लखनऊ से नयी दिल्ली तक की यात्रा के लिए एसी चेयरकार का किराया 1125 रुपये और एक्जिक्यूटिव चेयरकार के लिए 2310 रुपये होगा. इसी तरह नयी दिल्ली से लखनऊ का एसी चेयरकार का यात्री किराया 1280 रुपये और एक्जिक्यूटिव चेयरकार का किराया 2450 रुपये होगा.

(इनपुट भाषा)