नई दिल्ली. कांग्रेस बार-बार कैंब्रिज एनालिटिका से किसी भी तरह के रिश्ते को लेकर इनकार कर रही है. लेकिन, जो डॉक्यूमेंट्स सामने आ रहे हैं उससे वह घिरती जा रही है.  हमारे सहयोगी अखबार डीएनए के पास कैंब्रिज एनालिटिका की भारत में पैरेंट कंपनी एससीएल इंडिया के दो पावर प्वाइंट प्रेजेंटेंशन हैं. एससीएल इंडिया ने इसे साल 2012 में बनाया था. यह बिहेव्यरल चेंज कम्यूनिकेशन मेथडोलॉजी (व्यावहारिक परिवर्तन संचार पद्धति) के नाम से था. इसमें कुछ ऐसी सेवाएं थी जो कि विपक्ष की जासूसी के लिए प्रयोग की जा सकती थी. Also Read - बिहार: कांग्रेस के प्रदेश कार्यालय से 8 लाख रुपए बरामद, इनकम टैक्स अफसरों ने रणदीप सिंह सुरजेवाला से की पूछताछ

प्रेजेंटेशन में एससीएल इंडिया ने दावा किया है कि उसके पास ‘क्षेत्रीय ज्ञान’, पॉलिटिकिल इंटेलिजेंस और इलेक्शन मैनेजमेंट के लिए सॉफ्टरवेयर है. इसके साथ ही भारत के लिए व्यावहारिक परिवर्तन संचार पद्धति (behavioural change communications methodology) है. इसमें एक तरह से ‘ए टू जेड’ इंलेक्शन मैनेजमेंट सर्विस का कंप्लीट पैकेज है, जिसमें कास्ट (जातिगत) रिसर्च, मतदाता जनसांख्यिकी डेटा संग्रह, व्यावहारिक मतदान और टार्गेट ऑडिएंस एनालिसिस जैसे कैंपेन स्ट्रेटजी शामिल है. Also Read - वादा तेरा वादा.....बिहार चुनाव में लगी वादों की झड़ी, किस पार्टी ने जनता से क्या की है प्रॉमिस, जानिए

मोबाइल एप्लीकेश का दिया था ऑफर
कंपनी ने पार्टी के नेताओं को सशक्त बनाने के लिए एंड्रॉयड बेस्ड मोबाइल एप्लीकेशन का भी ऑफर दिया था. यह कैंडिडेट सिलेक्शन से लेकर वोटिंग मैनेजमेंट तक चुनाव को मैनेज कर सकता था. वहीं, प्रेजेंटेशन के ‘की डेलीवरेबल’ में ऐसी सेवाओं के बारे में बताया गया है, जिसे जासूसी के लिए प्रयोग किया जा सकता था. Also Read - Bihar Assembly Election 2020: तेजस्वी की चाल में उलझा जदयू, 77 सीटों पर सीधा मुकाबला

बिहार में राहुल को सेलेब्रिटी के रूप में पेश किया जा रहा था
व्यवहारिक मतदान, राजनैतिक एक्टिविटीज की मॉनिटरिंग, महत्वपूर्ण जानकारियों को जुटाना और वोटर्स की पहचान को टार्गेट करने जैसे संदिग्ध डेलिवरेबल कांग्रेस पार्टी को प्रस्तावित किए गए थे. बिहार के प्रेजेंटेशन में सवाल उठता है कि क्या कांग्रेस का कैंब्रिज एनालिटिका और एससीएल इंडिया से किसी तरह का जुड़ाव था. ‘फाइंडिंग-आईएनसी बिहार’ के नाम से बने एक स्लाइड में कहा गया है, पिछले चुनाव में राहुल गांधी की सभाओं में काफी भीड़ जुटी थी. लेकिन कांग्रेस के प्रत्याशियों के पास उस भीड़ को वोटबैंक में बदलने का कोई रोड मैप नहीं था. इसका सबसे बड़ा कारण है कि उसके पास समर्पित कार्यकर्ता नहीं है. प्रत्याशी राहुल गांधी को एक नेता के रूप में प्रस्तुत करने की जगह सेलेब्रिटी के रूप में प्रस्तुत करते हैं.

बिहार सर्वे का प्रेजेंटेशन
एससीएल इंडिया के बिहार सर्वे जिसका कांग्रेस नेतृत्व के सामने प्रेजेंटेशन हुआ था में कहा गया कि ‘राहुल गांधी सबसे लोकप्रिय नेता हैं’ ये हेडिंग कांग्रेस कार्यकर्ताओं को मोटिवेट कर सकती है. बिहार के प्रेजेंटेशन के आखिर में जिला स्तर के वास्तविक जातिगत नेता और जननेताओं को आगे करने का सुझाव दिया गया.

कांग्रेस ने किया था इनकार
बता दें कि कांग्रेस सोशल मीडिया हेड दिव्य स्पंदना ने 27 मार्ट को ट्वीट करके कहा कि कांग्रेस कभी भी कैंब्रिज एनालिटिका के साथ राष्ट्रीय या क्षेत्रीय स्तर पर नहीं जुड़ी रही. हालांकि, बाद में एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि कैंब्रिज एनालिटिका ने पार्टी से संपर्क करने की कोशिश की थी और कांग्रेस ने उससे बातचीत की थी.

जेमी बर्लेट की डॉक्यूमेंट्री पर घिरी थी कांग्रेस
इस दौरान पत्रकार और टेक ब्लॉगर जेमी बर्लेट की एक डॉक्यूमेंट्री वायरल हो रही है, जिसमें कैंब्रिज एनालिटिका के दफ्तर में कांग्रेस का चुनाव चिन्ह दिख रहा है. डॉक्यूमेंट्री में दिख रहा है कि बर्लेट कैंब्रिज एनालिटिका के तत्कालीन सीईओ एलेग्जेंडर निक्स के साथ लंदन में उनके दफ्तर में मीटिंग कर रहे हैं. डियो में दिख रहा है कि जब बर्लेट निक्स के कमरे में घुस रहे हैं तो निक्स खड़े होकर उनका स्वागत करते हैं. इस दौरान निक्स के दाहिनी तरफ नीचे की ओर दीवाल पर एक पोस्टर दिख रहा है. यह कांग्रेस पार्टी के ‘हाथ’ का सिंबल है. इस ‘हाथ’ के नीचे बोल्ड लेटर में ‘कांग्रेस’ लिखा है. इस पोस्टर में डवलपमेंट फॉर ऑल (सबका विकास) लिखा हुआ है.

अमरीश त्यागी ने बना ली थी दूरी
दूसरी तरफ ओवलेनो बिजनेश इंटेलिजेंश (ओबीआई) के डायरेक्टर अमरीश त्यागी कैंब्रिज एनालिटिका से दूरी बना ली है. कंपनी ने अपने बयान में कहा है कि ओबीआई जनवरी 2010 में आई और अमरीश त्यागी उसके डायरेक्टरों में एक थे.