क्या इंटरनेट पर निगेटिव रिव्यू देना Defamation है? High Court ने ये कहा

अदालत ने कहा कि भारतीय संविधान के आर्टिकल 19(1)(a) के तहत इंटरनेट पर रिव्यू लिखना, फ्रीडम ऑफ स्पीच के अंतर्गत आता है.

Published date india.com Updated: September 15, 2023 11:29 AM IST
Madras High Court (Photo File)
Madras High Court (Photo File)

Defamation Case: आप जब कोई चीज खरीदते हैं, या कोई सर्विस लेते हैं, उसके रिव्यू भी देते होंगे. आप रिव्यू निगेटिव देते हैं या पॉजिटिव, ये फैसला आपका होता है. मद्रास हाईकोर्ट (Madras High Court) के सामने एक सवाल आया कि क्या किसी सर्विस को लेकर इंटरनेट पर निगेटिव रिव्यू देना Defamation हिंदी में कहें तो मानहानि है? इस पर हाईकोर्ट का फैसला सुनना चाहेंगे. सुनिए, अदालत ने कहा कि बिलकुल भी नहीं. ये मानहानि का मामला नहीं है.

अदालत ने आगे कहा,

“इंटरनेट एक फ्री प्लेटफॉर्म है और वहां पर अपनी बातें रखने में कोई बुराई नहीं है. सभी को बोलने की स्वतंत्रता है.इसलिए गूगल पर वकील के सर्विस को लेकर अपना रिव्यू लिखना मानहानि के दायरे में नहीं आता है.”

दरअसल, केस कुछ यूं था कि एस कीर्तिघा नाम की लड़की ने एडवोकेट वीपी सारथी के क्लाइंट से लीगल सर्विस ली. वो सर्विस से खुश नहीं थी. उसने सर्विस को लेकर गूगल पर निगेटिव रिव्यू लिख दिया. इसके बाद एडवोकेट ने क्लाइंट के खिलाफ मानहानि का केस दर्ज करा दिया. हालांकि Judicial Magistrate ने इस मामले को खारिज कर दिया था. वकील ने इस फैसले के खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया.

क्लाइंट के पिता ने अदालत को बताया कि हमने रिव्यू को लेकर वकील से माफी भी मांग ली. रिव्यू भी हटा दिए. फिर भी बेटी के साथ-साथ मेरे भी खिलाफ मानाहानि का केस किया गया.

High court ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं, सबूतों को देखा और निचली अदालत के फैसले को सही ठहराया. अदालत ने कहा कि भारतीय संविधान के आर्टिकल 19(1)(a) के तहत इंटरनेट पर रिव्यू लिखना, फ्रीडम ऑफ स्पीच के अंतर्गत आता है. वकील की याचिका खारिज की जाती है.

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चलते-चलते ये भी जान लीजिए कि मानहानि किस चिड़िया का नाम है?

IPC के सेक्शन 499 में मानहानि के बारे में बताया गया है. इस सेक्शन के मुताबिक, किसी के लिए बुरी बात बोलना, लोगों के बीच संबंधित व्यक्ति के लिए अपमानजनक पत्र भेजना, किसी की प्रतिष्ठा गिराने वाली अफवाह फैलाना, अपमानजनक टिप्पणी प्रसारित या पब्लिश करना मानहानि कहलाता है.

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