अहमदाबाद: सीबीआई की विशेष अदालत ने इशरत जहां कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में पूर्व पुलिस अधिकारियों डी. जी. वंजारा और एन. के. अमीन को गुरुवार को आरोपमुक्त कर दिया. गुजरात सरकार की ओर से दोनों अधिकारियों के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति सीबीआई को नहीं मिलने के बाद वंजारा और अमीन ने आरोपमुक्त करने की अर्जी दी थी. सीबीआई की विशेष अदालत के जज जे. के. पांड्या ने कहा कि चूंकि सरकार ने उनके खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति नहीं दी है ऐसे में उनकी आरोपमुक्त करने की अर्जी को मंजूर किया जाता है. इसलिए उनके खिलाफ चल रहा मामला खत्म किया जाता है. Also Read - महाराष्ट्र में बिना कोरोना रिपोर्ट के एंट्री बंद, दिल्ली सहित इन 4 राज्य के लोगों को होगी मुश्किल

पीएम मोदी के ‘वंदे मातरम्’ पर नीतीश कुमार की चुप्पी, क्या फिर होगा ‘यू-टर्न’? गर्माई राजनीति Also Read - Night Curfew in Gujarat: कोरोना के बढ़ते मामलों के बीच अहमदाबाद, वडोदरा, सूरत और राजकोट में अब से केवल रात का कर्फ्यू

आईपीसी की धारा 197 के तहत सरकारी ड्यूटी के तहत किसी भी सरकारी कर्मचारी द्वारा किए गए काम के सिलसिले में मुकदमा चलाने के लिए सरकार से मंजूरी मिलना अनिवार्य है. मुंबई के पास मुंब्रा की रहने वाली 19 वर्षीय इशरत, जावेद शेख उर्फ प्राणेश पिल्लै, अमजद अली अकबर अली राणा और जीशान जौहर की 15 जून, 2004 में अहमदाबाद के बाहर पुलिस के साथ हुई कथित फर्जी मुठभेड़ में मौत हो गई थी. पुलिस ने दावा किया था कि वे लोग आतंकवादी थे और तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी की हत्या करने के लिए गुजरात आए थे. Also Read - हाथरस मामला: पॉलीग्राफ, ब्रेन मैपिंग टेस्ट के लिए चार आरोपियों को गुजरात लेकर गई सीबीआई की टीम

यहां है यदुवंशी-रघुवंशी के बीच मुकाबला, क्या भाजपा के ‘पायलट’ की होगी सेफ लैंडिंग!