नई दिल्ली: इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने मंगलवार को कहा कि इस्लामी कट्टरवाद और इससे संबंधित आतंकवादियों का खतरा अंतरराष्ट्रीय तानेबाने को प्रभावित कर सकता है तथा इस चुनौती से निपटने के लिए भारत एवं इस्राइल के बीच अधिक मजबूत संबंधों की जरूरत है.Also Read - इजराइल में नई सरकार, दक्षिणपंथी, वामपंथी और उदारवादी पार्टियों के गठबंधन से नेतन्याहू के शासन पर विराम

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‘रायसीना संवाद’ के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए नेतन्याहू ने भारत को इस्राइल का ‘स्वाभाविक मित्र एवं साझेदार’ करार दिया. उनके इस कथन पर दर्शक दीर्घा में बैठे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुस्कराए. Also Read - पीएम मोदी ने फोन पर की नेतन्याहू से बात, बोले- आतंकी हमले के दोषियों को सजा दिलाने के लिए पूरी ताकत झोंक देगा भारत

नेतन्याहू बुधवार को मोदी के साथ गुजरात का दौरा करेंगे. मोदी ने पिछले साल इस्राइल का दौरा किया था. वह इस्राइल का दौरा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने.

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नेतन्याहू ने कहा, ‘‘नवोन्मेष के लिए किए जा रहे प्रयास को इस्लामी कट्टरवाद और इससे संबंधित आतंकवादी चुनौती दे रहे हैं. ये अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को अशांत कर सकते हैं.’’ उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक मजबूत राष्ट्र के तौर पर उभरने के लिए आर्थिक, सैन्य और राजनीतिक ताकत विकसित करने की जरूरत है. विदेश मंत्रालय और ‘ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन’ की ओर से आयोजित किए गए इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भी शामिल हुईं.

नेतन्याहू ने भारत में लाल फीताशाही पर अंकुश लगाने और कारोबार सुगमता के लिए उठाए कदमों को लेकर मोदी सरकार की तारीफ की.

भारत के छह दिनों के दौरे पर आए नेतन्याहू ने कहा कि एक सरकार आर्थिक प्रगति को सुगम बनाना और बाधित करना दोनों काम कर सकती है. अगर कारोबारी इकाइयों के जरिए नवोन्मेष में मददगार मुक्त बाजार उपलब्ध है तो प्रगति संभव है. उन्होंने कहा, ‘‘कमजोर नहीं टिकते, मजबूत टिकते हैं…आप मजबूत के साथ गठजोड़ करिए. ’’ इस्राइली प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की रक्षा के लिए एक मजबूत सेना की जरूरत होती है और इसके लिए बहुत सारे पैसे की जरूरत है. यह पैसा मजबूत अर्थव्यवस्था से आता है. नेतन्याहू ने इस बात पर जोर दिया कि लोकतांत्रिक देशों के बीच गठजोड़ होना चाहिए.