बेंगलुरु: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के चेयरमैन डॉक्टर के सिवन का कहना है कि हाल ही में लॉन्च किए गए Gsat-6A के स्पेस एजेंसी का सम्पर्क टूट गया है, लेकिन स्पेस एजेंसी की तरफ से फिर से सम्पर्क स्थापित करने की कोशिश की जा रही है. डॉ. सिवान ने कहा कि सैटलाइट से सम्पर्क स्थापित करने की उम्मीद अभी बाकी है.
इसरो ने कहा कि 29 मार्च को प्रक्षेपित किए गए जीसैट-6 ए उपग्रह के साथ उनका संपर्क टूट गया है और उससे फिर से संपर्क जोड़ने की कोशिश की जा रही है। साथ ही, शुरूआती डेटा से यह जाहिर हो रहा है कि इसके ठीक होने की गुंजाइश है. Also Read - Sarkari Naukri 2020: ISRO Recruitment 2020: ISRO में इन पदों पर आवेदन करने की है कल आखिरी तारीख, जल्द करें अप्लाई

अंग्रेजी अखबार टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में डॉक्टर सिवान ने कहा कि सफलतापूर्वक काफी देर तक फायरिंग के बाद जब सैटलाइट तीसरे और अंतिम चरण के तहत 1 अप्रैल 2018 को सामान्य ऑपरेटिंग की प्रक्रिया में था, इससे हमारा संपर्क टूट गया। सैटलाइट GSAT-6A से दोबारा लिंक के लिए लगातार कोशिश की जा रही है. Also Read - Sarkari Naukri 2020: ISRO में इन विभिन्न पदों पर निकली वैकेंसी, जल्द करें आवेदन, 2 लाख तक मिलेगी सैलरी

अंतरिक्ष एजेंसी का उपग्रह से उस वक्त संपर्क टूट गया, जब इसने तीसरे और आखिरी कदम के तहत ईंजन को चालू करने की कोशिश की ताकि उपग्रह को लक्षित स्थान तक पहुंचाया जा सके. इसे आंध्र प्रदेश के श्री हरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से 29 मार्च को प्रक्षेपित किया गया था. इसरो अध्यक्ष के. सिवन ने कहा कि शुरूआती डेटा से यह जाहिर होता है कि इसके ठीक होने की गुंजाइश है लेकिन उपग्रह से संपर्क स्थापित होना जरूरी है. उन्होंने कहा कि जब कभी गड़बड़ी होती है तो उपग्रह ‘सेफ मोड’ में चला जाता है और यह फौरन पहले वाली स्थिति में लौट आता है. लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ. Also Read - Chandrayan-2 ने चंद्रमा पर क्रेटर की खींची तस्वीर, ISRO ने दिया यह नाम...

उन्होंने कहा कि एक बार हम संपर्क स्थापित कर लें, फिर हम आगे का कार्य कर पाएंगे.’’ सिवन ने स्थिति ठीक होने के संबंध में एक सवाल के जवाब में कहा कि फिलहाल शुरूआती डेटा से यह जाहिर हो रहा है कि हमारे पास गुंजाइश है, हम कोशिश कर रहे हैं. अंतरिक्ष एजेंसी ने कहा कि जीसैट-6ए को उसकी कक्षा में ऊपर उठाने का दूसरा ऑपरेशन शनिवार को सफलतापूर्वक किया गया था लेकिन एक अप्रैल को होने वाले तीसरे और आखिरी चरण में उपग्रह से संपर्क टूट गया.

दरअसल, किसी उपग्रह को तीन चरणों में उसकी कक्षा में स्थापित किया जाता है. इसरो का मुख्यालय बेंगलुरू में है. 2,140 किग्रा वजन के जीसैट – 6ए को ‘जीएसएलवी – एफ 08’ रॉकेट से प्रक्षेपित किया गया था. रॉकेट के तीसरे चरण में एक क्रायोजोनिक इंजन लगा हुआ था. उपग्रह का लक्ष्य दूर दराज में स्थित जमीनी टर्मिनलों के जरिए मोबाइल संचार में मदद करना है.