Isro Finds Safe Landing Site On Moon For Chandrayaan 4 India First Lunar Sample Return Mission
ISRO को मिली बड़ी कामयाबी, चांद पर कर दी अब तक की सबसे बड़ी खोज; Chandrayaan 4 को लेकर मिली बड़ी अपडेट
Chandrayaan 4: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने चंद्रयान 4 मिशन को लेकर बड़ी अपडेट दी है. दरअसल भारतीय स्पेस एजेंसी ने मिशन के लिए सुरक्षित लैडिंग साइट खोजी है.
Chandrayaan 4: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने चंद्रयान 4 मिशन को लेकर बड़ी अपडेट दी है. दरअसल भारतीय स्पेस एजेंसी ने इस मिशन के लिए चांद के दक्षिणी ध्रुव पर के पास सुरक्षित लैंडिंग के लिए एक साइट खोजी है. इस जगह को खोजने के लिए इसरो ने स्पेस एप्लीकेशंस सेंटर के वैज्ञानिकों ने चंद्रयान-2 के ऑर्बिटर से ली गई तस्वीरों की मदद ली है. साइंटिस्टों ने चांद के साउथ पोल के मॉन्स मूटन (Mons Mouton) नाम के पहाड़ के पास 1 वर्ग किलोमीटर का एक पैच सबसे अच्छा बताया गया है.
क्या है Chandrayaan 4 मिशन?
Chandrayaan 4 इसरो का पहला ऐसा मिशन होगा जिसमें चांद की सतह से मिट्टी और पत्थर वापस धरती पर लाए जाएंगे. ऐसे में ये मिशन भारत के सबसे जटिल और अहम चंद्र मिशनों में से एक होगा. इस मिशन के कई हिस्से होंगे.
प्रोपल्शन मॉड्यूल- प्रोपल्शन मॉड्यूल चंद्रयान 4 का पहला हिस्सा होगा जो रॉकेट की तरह अंतरिक्ष में आगे बढ़ाएगा.
डिसेंडर मॉड्यूल- चंद्रयान 4 का ये दूसरा हिस्सा होगा जो चांद की सतह पर उतरेगा.
एसेंडर मॉड्यूल- ये मिशन का तीसरा हिस्सा होगा इसमें सैंपल लेकर आर्बिट में वापसी करेगा.
ट्रांसफर मॉड्यूल और री-एंट्री मॉड्यूल- ये मिशन का सबसे अंतिम हिस्सा होगा जो इकट्ठा किए गए सैंपल को धरती पर वापस लाएगा.
Chandrayaan 4 का लक्ष्य-
चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग करना
सैंपल इकट्ठा करना
ऑर्बिट में भेजना
सैंपल को फिर पृथ्वी पर लाना
उपलब्धि- इस सफलता के बाद भारत, अमेरिका, रूस और चीन के बाद उन देशों की लिस्ट में शामिल हो जाएगा जो चांद से सैंपल ला चुके हैं.
Chandrayaan 4 के लिए इसरो के द्वारा ढूंढी गई सुरक्षित लैंडिंग साइट बेहद अहम है. क्योंकि चांद की साउथ पोल की सतह बेहद खुरदुरी है. यहां की जमीन पर बड़े-बड़े गड्ढे, पत्थर और ऊंची-नीची जगहें. ऐसे में सुरक्षित लैडिंग साइट सॉफ्ट लैडिंग में बड़ी भूमिका निभाती है.
सुरक्षित लैडिंग के लिए क्या है जरूरी-
ढलान 10 डिग्री से कम हो
पत्थर 0.32 मीटर से छोटे हों
कम से कम 11-12 दिन सूर्य की रोशनी मिले, जिससे पृथ्वी से रेडियो संपर्क अच्छा हो. कोई बड़ा खतरा न हो.
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