चेन्नई। आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा से संचार उपग्रह जीसैट-6 ए को इसरो ने सफलतापूर्व लॉन्च कर दिया. 415.6 टन वजनी और 49.1 मीटर लंबे जीएसएलवी रॉकेट को आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा के दूसरे लांच पैड से शाम 4.56 बजे लॉन्च किया गया. रॉकेट लॉन्च के करीब 17 मिनट बाद जीसैट-6ए उपग्रह को कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित कर दिया गया. भारत के संचार उपग्रह जीसैट-6 ए को ले जा रहे जीएसएलवी रॉकेट लॉन्च की उलटी गिनती गुरुवार को सामान्य रूप से जारी थी. इसकी उल्टी गिनती बुधवार दोपहर 1.56 बजे शुरू हुई थी. इस दौरान रॉकेट में ईंधन भरा गया और इसकी प्रणालियों की जांच की गई.

भारत के नवीनतम संचार उपग्रह जीएससैट-6 ए का आज यहां अंतरिक्ष केंद्र से भूतुल्यकालिक रॉकेट जीएसएनवी- एफ08 के जरिये प्रक्षेपण किया गया और निर्धारित कक्षा में इसे सफलतापूर्वक स्थापित किया गया. इसके साथ ही इसरो के खाते में एक और उपलब्धि जुड़ गई. जीएसएलवी- एफ08 ने सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से उड़ान भरने के तकरीबन18 मिनट बाद उपग्रह को कक्षा में प्रविष्ट कराया. इस प्रक्षेपण यान में तीसरे चरण का स्वदेश विकसित क्रायोजेनिक इंजन लगा था.

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन( इसरो) ने बताया कि यह उपग्रह मल्टी बीम कवरेज सुविधा के जरिये मोबाइल संचार में मदद प्रदान करेगा. इसरो के अध्यक्ष के सिवन ने मिशन को सफल बताया और इस कार्य में लगे वैज्ञानिकों को बधाई दी. सिवन ने बताया कि संचार उपग्रह को निर्धारित कक्षा में सफलतापूर्वक स्थापित किया गया. यह जीएसएलवी- एफ08 की12 वीं उड़ान थी और स्वदेशी क्रायोजेनिक अपर स्टेज के साथ छठी उड़ान थी. इसरो ने बताया कि जीसैट-6 ए, जीसैट-6 की ही तरह है. यह उच्च क्षमता वाला एस- बैंड संचार उपग्रह है. इस मिशन में I-2K उपग्रह बस का इस्तेमाल किया गया. इस मिशन की मियाद तकरीबन10 साल है.

इसरो के मुताबिक, रॉकेट के दूसरे चरण में इस बार दो सुधार किए गए हैं जिसमें उच्च गति के विकास इंजन और इलेक्ट्रोमैकेनिकल एक्ट्यूएशन सिस्टम (विद्युत प्रसंस्करण प्रणाली) शामिल है. इसरो ने कहा कि जीसैट-6ए उपग्रह जीसैट-6 उपग्रह के समान हैं.

इसकी खासियतें–

-सैटेलाइट 10 साल तक  काम करेगा

-मोबाइल कम्युनिकेशन बेहतर होगा

-सैटेलाइट का उद्देश्य मल्टी बीम कवरेज सुविधा के जरिए भारत को मोबाइल संचार प्रदान करना है.

-इसकी लागत 270 करोड़ रुपये है.

– इसे सेना के इस्तेमाल के हिसाब से भी डिजाइन किया गया है.