नई दिल्ली: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने फ्रेंच गुएना के अंतरिक्ष केन्द्र से अपने 40वें संचार उपग्रह जीसैट-31 को बुधवार को सफलता पूर्वक प्रक्षेपित कर दिया. फ्रेंच गुएना में स्थित यूरोपीय स्पेस सेंटर से भारतीय समयानुसार बुधवार रात 2 बजकर 31 मिनट पर किया लॉन्च किया गया. यह लॉन्चिंग एरियनस्पेस के एरियन-5 रॉकेट से किया गया. सुबह 3 बजकर 14 मिनट पर सैटलाइट जिओ-ट्रांसफर ऑर्बिट में स्थापित हो गया. Also Read - PSLV C48 से निगरानी उपग्रह रिसैट-2बीआर1 और 9 सेटेलाइट अंतरिक्ष में सफलतापूर्वक प्रक्षेपित

अंतरिक्ष एजेंसी के अनुसार उपग्रह का जीवनकाल 15 साल का है. कक्षा के अंदर मौजूद कुछ उपग्रहों पर परिचालन संबंधी सेवाओं को जारी रखने में यह उपग्रह मदद मुहैया करेगा और जियोस्टेशनरी कक्षा में केयू-बैंड ट्रांसपोंडर की क्षमता बढ़ायेगा. एक बयान में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने बताया कि 2,535 किलोग्राम वजनी उपग्रह को फ्रेंच गुएना में कुरू से एरिएन-5 (वीए247) के माध्यम से प्रक्षेपित किया गया. Also Read - एक बार फिर इतिहास रचने को तैयार इसरो, कार्टोसैट-3 के साथ 13 उपग्रहों के प्रक्षेपण की उल्टी गिनती शुरू

एजेंसी के अनुसार, उपग्रह जीसैट-31’ को इसरो के परिष्कृत I-2K बस पर स्थापित किया गया है. यह इसरो के पूर्ववर्ती इनसैट/जीसैट उपग्रह श्रेणी के उपग्रहों का उन्नत रूप है. यह उपग्रह भारतीय भू-भाग और द्वीप को कवरेज प्रदान करेगा. इसरो ने यह भी कहा कि जीसैट-31 का इस्तेमाल सहायक वीसैट नेटवर्कों, टेलीविजन अपलिंक्स, डिजिटल उपग्रह समाचार जुटाने, डीटीएच टेलीविजन सेवाओं, सेलुलर बैक हॉल संपर्क और इस तरह के कई ऐप्लीकेशन में किया जाएगा. इसरो के अनुसार यह उपग्रह अपने व्यापक बैंड ट्रांसपोंडर की मदद से अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और हिंद महासागर के विशाल समुद्री क्षेत्र के ऊपर संचार की सुविधा के लिए विस्तृत बीम कवरेज प्रदान करेगा.