नई दिल्ली। भारत के सबसे भारी रॉकेट जीएसएलवी मार्क-3 का ऐतिहासिक प्रक्षेपण के बाद भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) अब कार्टोसैट सीरीज का सैटेलाइट लॉन्च करने की तैयारी कर रहा है. निगरानी की अपनी दक्षता के कारण कार्टोसैट सीरीज के सैटेलाइट को ‘आई इन द स्काई’ के नाम से भी जाना जाता है.

कार्टोसैट-2 सीरीज का यह चौथा सैटेलाइट है. इसका वजन 550 किलोग्राम है. इस सैटेलाइट को पीएसएलवी-सी38 रॉकेट के जरिए जून के आखिरी हफ्ते में लॉन्च किया जाएगा. इस सैटेलाइट के कक्षा में स्थापित होने के साथ ही भारत अमेरीका, इजरायल और चीन जैसे देशों के विशिष्ट वर्ग में शामिल हो जाएग. भारत के पास एक ऐसा जासूसी सैटेलाइट होगा जो धरती पर होने वाली गतिविधियों की नजदीक से निगरानी कर सकता है.

इस सैटेलाइट में पैनक्रोमैटिक (पैन) कैमरा लगा है जो इलेक्ट्रोमैगनेटिक स्पेक्ट्रम के दिखने वाले क्षेत्र में पृथ्वी की ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीरें लेने में सक्षम है. इस हाई रिजॉल्यूशन पैन कैमरा के जरिए 9.6 किमी की दूरी तक की तस्वीरें ली जा सकती है.

कार्टोसैट-2सी सीरीज के सैटेलाइट ने इंडियन आर्मी के निगरानी और टोही क्षमता को मजबूत किया है. कार्टोसैट-2सी सीरीज के सैटेलाइट का पहली बार मुख्य प्रयोग 2016 में सर्जिकल स्ट्राइक के वक्त हुआ था. सेना को एलओसी पर आतंकियों के लॉन्च पैड तबाह करने में इस सैटेलाइट से काफी मदद मिली थी.

कार्टोसैट सैटेलाइट के तस्वीरों का इस्तेमाल मुख्य तौर पर कार्टोग्राफिक एप्लीकेशंस, शहरी और ग्रामीण एप्लीकेशंस, तटीय भूमि उपयोग और रेगुलेशन, उपयोगिता प्रबंधन जैसे सड़क नेटवर्क की निगरानी, जल वितरण जैसे कामों के लिए किया जाता है. इसरो के एक सूत्र ने बताया कि हाल के वर्षों में कार्टोसैट सैटेलाइट तस्वीरों की मांग बढ़ी है. केंद्र सरकार के ज्यादातर विभाग किसी भौगोलिक क्षेत्र के सटीक डाटा पाने के लिए और वहां विकास परियोजनाओं को लागू करने के लिए सैटेलाइट तस्वीरों पर भरोसा जता रहे हैं.