बेंगलुरु. अंतरिक्ष क्षेत्र में काम करने वाली भारतीय कंपनियों के लिए गुरुवार का दिन काफी अहमियत रखता है. इसरो पहली बार निजी कंपनियों के सहयोग से बने अपने किसी उपग्रह को लॉन्च करने जा रहा है. उपग्रह का नाम आईआरएनएसएस-1 एच है. इसरो शाम 6 बजकर 59 मिनट पर इसे अपने श्रीहरिकोटा अंतरिक्ष केंद्र से पीएसएलवी-सी 39 रॉकेट की मदद से छोड़ेगा. यह इंडियन रीजनल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम का आठवां उपग्रह है. 1425 किग्रा वजनी यह उपग्रह आईआरएनएसएस-1 का स्थान लेगा, जिसकी परमाणु घड़ियों ने काम करना बंद कर दिया है.

यह भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली आईआरएनएसएस का 8वां उपग्रह है. इस उपग्रह को पीएसएलवी-सी 39 के जरिये प्रक्षेपित किया जायेगा और आईआरएनएसएस-1एच, आईआरएनएसएस-1ए की जगह लेगा जिसकी तीन रुबिडियम आणविक घड़ियों ने काम करना बंद कर दिया है.

इसरो ने कहा ‘पीएसएलवी-सी39/आईआरएनएसएस-1एच मिशन का प्रक्षेपण 31 अगस्त को शाम छह बजकर 59 मिनट पर सतीश धवन अंतरिक्ष केन्द्र,श्रीहरिकोटा से किया जायेगा.’ इस उपग्रह का वजन 1,400 किलोग्राम है जिसे इसरो ने छह लघु एवं मध्यम उद्योगों के समूह के साथ मिलकर बनाया है. भारतीय क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली (आईआरएनएसएस) एक स्वतंत्र क्षेत्रीय नौवहन उपग्रह प्रणाली है जिसे अमेरिका स्थित जीपीएस के अनुरूप भारत में विकसित किया गया है.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस प्रणाली को ‘एनएवीआईसी’ (भारतीय नक्षत्र के साथ नौवहन) नाम दिया था जिसमें समुद्री नौवहन,आपदा प्रबंधन,वाहन ट्रैकिंग और बेड़ा प्रबंधन आदि सेवाएं शामिल हैं. इसरो ने इससे पहले सात उपग्रह प्रक्षेपित किये थे – 28 अप्रैल 2016 को आईआरएनएसएस-1जी, आईआरएनएसएस-1 एफ (10 मार्च,2016) ,आईआरएनएसएस-1 ई (20 जनवरी,2016), आईआरएनएसएस-1डी (28 मार्च,2015), आईआरएनएसएस-1सी (अक्टूबर 16,2014), आईआरएनएसएस-1बी (4 अप्रैल,2014) और 01 जुलाई 2013 को आईआरएनएसएस-1ए. इसरो के अधिकारियों के अनुसार इन सातों उपग्रहों की कुल लागत 1,420 करोड़ रुपये हैं.

25 फीसदी योगदान निजी कंपनियों का
सैटेलाइट सिस्टम के इस 8वें उपग्रह को बनाने में 25% योगदान निजी कंपनियों का है. देश की 6 कंपनियों के 70 इंजीनियर इस प्रोजेक्ट में शामिल रहे. इसरो के मुताबिक यह पहला मौका है जब किसी उपग्रह के निर्माण में निजी कंपनियां सीधे तौर पर शामिल हुई हैं. इससे पहले उपग्रह निर्माण में निजी कंपनियां केवल हार्डवेयर, सॉफ्टवेयर, पार्ट और जरूरी सामान ही मुहैया कराती थीं. पर इस उपग्रह में निजी कंपनियों के इंजीनियर और टेक्निकल्स असेंबलिंग, इलेक्ट्रिकल इंटीग्रेशन, टेस्टिंग आदि काम में शामिल रहे हैं. इसके लिए 6 निजी कंपनियों का एक ग्रुप बनाया गया था. इन कंपनियों के 70 लोगों को अलग से ट्रेनिंग भी दी गई. इसरो उपग्रह केंद्र(आइसैक) के निदेशक एम अन्नादुरै का कहना है कि अगले आईआरएनएसएस-1 आई में करीब 95% काम निजी कंपनियां करेंगी