नई दिल्ली| भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की लॉन्चिंग क्षमता जल्द ही बढ़ने वाली है. श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र में देश के एकमात्र लॉन्चपैड सेंटर को वर्ष के अंत तक बिल्डिंग मिल जाएगी जिससे इसरो की सैटलाइट भेजने की क्षमता सुधार होगा. इसरो चेयरमैन किरन कुमार ने बताया कि पहली नैविगैशन सैटलाइट IRNSS-1A को रिप्लेस करने वाली सैटलाइट को इस महीने के अंत तक लॉन्च किया जाएगा.

देशी जीपीएस या नैविगेशन सिस्टम में प्रयुक्त 7 सैटलाइट में से एक IRNSS-1A सैटलाइट के रिप्लेसमेंट की जरूरत तब महसूस की गई जब इस सैटलाइट की तीन एटॉमिक घड़ियों ने काम करना बंद कर दिया. यह घड़ियां सटीक स्थानीय डेटा उपलब्ध कराती थीं.

इसरो के चेयरमैन के अनुसार बिल्डिंग का काम लगभग पूरा हो चुका है. नई असेंबली सुविधा से हम समानांतर तौर पर असेंबल कर सकेंगे और मौजूद दो लॉन्चपैड्स तक ले जा सकेंगे इससे श्रीहरिकोटा सेंटर की लॉन्चिंग क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी.

उन्होंने बताया, हम लॉन्चिंग क्षमता बढ़ाने में आने वाली बाधाओं को एक-एक करके दूर कर रहे हैं. नई असेंबल बिल्डिंग सुविधा के साथ हम एक साल में 12 रॉकेट लॉन्च कर सकेंगे. फिलहाल यह संख्या 7 है.

गौरतलब है कि 15 फरवरी को इसरो ने एक साथ 104 सैटलाइट छोड़कर इतिहास रचा था. श्रीहरिकोटा से 23 जून को कार्टोसैट-2 सैटलाइट समेत 31 सैटलाइट एक साथ लॉन्च किए गए थे. इसरो चैयरमैन ने बताया, इस साल के अंत तक हम 3-4 सैटलाइट लॉन्च करने की योजना बना रहे हैं.

अगले साल इसरो की चंद्रयान-2 मिशन की लॉन्चिंग और जीएसएलवी Mk III D2 की दूसरी विकासात्मक उड़ान की योजना शामिल है.

बड़ी संख्या में विदेशी सैटलाइट लॉन्चिंग से इसरो ने 2015-16 में 230 करोड़ रुपए कमाए. करीब 38,000 करोड़ कीमत की ग्लोबल लॉन्च सर्विसेज मार्केट में इसरो की हिस्सेदारी 0.6 % है.