नई दिल्ली: भारत के भूस्थैतिक संचार उपग्रह जीसैट-7ए को श्रीहरिकोटा से प्रक्षेपण यान जीएसएलवी-एफ11 से प्रक्षेपित करने के लिए 26 घंटे की उल्टी गिनती मंगलवार को शुरू हो गई. इसरो ने यह जानकारी दी है. 2,250 किलोग्राम वजनी जीसैट-7ए उपग्रह को लेकर जाने वाले प्रक्षेपण यान जीएसएलवी-एफ11 बुधवार शाम चार बजकर 10 मिनट पर यहां से करीब 110 किलोमीटर दूर स्थित श्रीहरिकोटा के स्पेसपोर्ट के दूसरे लांच पैड से प्रक्षेपित किया जाएगा. इसरो ने कहा कि जीसैट-7ए का निर्माण भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने किया है और इसका जीवन आठ वर्ष है. यह भारतीय क्षेत्र में केयू-बैंड के उपयोगकर्ताओं को संचार क्षमताएं मुहैया कराएगा. Also Read - Sarkari Naukri 2020: ISRO Recruitment 2020: ISRO में इन पदों पर आवेदन करने की है कल आखिरी तारीख, जल्द करें अप्लाई

इसरो ने कहा, ‘श्रीहरिकोटा में सतीश धवन स्पेस सेंटर में जीएसएलवी-एफ 11 के जरिये संचार उपग्रह जीसैट-7ए को प्रक्षेपित करने के लिए 26 घंटे की उल्टी गिनती दोपहर दो बजकर 10 मिनट (भारतीय समयानुसार) पर शुरू हुई. इसके प्रक्षेपण का समय बुधवार शाम चार बजकर 10 मिनट निर्धारित है. जीएसएलवी एफ-11 जीसैट-7ए को जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर आर्बिट (जीटीओ) में छोड़ेगा और उसे आनबोर्ड प्रणोदन प्रणाली का इस्तेमाल करते हुए अंतिम भूस्थैतिक कक्षा में स्थापित किया जाएगा.

भारतीय अंतरिक्ष एजेंसी के सामने रणनीतिक उपग्रहों की मांग बढ़ गई है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन(इसरो) के एक शीर्ष अधिकारी ने नाम उजागर न करने की शर्त पर कहा, “रणनीतिक क्षेत्रों में उपग्रहों की मांग बढ़ी है. लगभग छह-सात उपग्रहों को बनाने की योजना है. नवंबर में इसरो ने हिसआईएस उपग्रह लांच किया था और इससे पैदा होने वाले आंकड़ों का भारतीय सेना भी इस्तेमाल कर सकेगी.

2013 में, इसरो ने भारतीय नौसेना के इस्तेमाल के लिए जीसैट7 या रुकमिणी संचार उपग्रह लांच किया था. भारतीय वायुसेना के लिए जीसैट-7ए उपग्रह जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हिकल (जीएसएलवी एमके2) के जरिए प्रक्षेपित किया जाएगा. उपग्रह का अधिकतम जीवनकाल आठ वर्षो का है. यह भारतीय क्षेत्र में कू बैंड में वायुसेना को संचार क्षमता प्रदान करेगा.

(इनपुट-एजेंसियां)