नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा कि वह जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट की किशोर न्याय समिति की उस रिपोर्ट से संतुष्ट है, जिसमें कहा गया है कि अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को खत्म किए जाने के बाद किसी भी नाबालिग को जेलों में नजरबंद नहीं किया गया. सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के चार जजों की रिपोर्ट प्रस्‍तुत करने के बाद कहा कि ऐसा लगता है कि गलत सूचनाएं प्रसारित की जाती रही हैं और किसी भी नाबालिग को हिरासत में नहीं लिया जा रहा है.

शीर्ष अदालत ने किशोर न्याय समिति की रिपोर्ट के अवलोकन के बाद कहा कि हाईकोर्ट के चार न्यायाधीशों ने जम्मू कश्मीर की सभी जेलों का दौरा किया और उन्होंने स्पष्ट रूप से लिखा है कि किसी भी नाबालिग को गैरकानूनी तरीके से नजरबंद नहीं किया गया.

न्यायमूर्ति एन वी रमण की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि शीर्ष अदालत द्वारा अपने ही न्यायाधीशों पर अविश्वास करना उचित नहीं होगा. सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के चार जजों की रिपोर्ट प्रस्‍तुत करने के बाद कहा कि ऐसा लगता है कि गलत सूचनाएं प्रसारित की जाती रही हैं और किसी भी नाबालिग को हिरासत में नहीं लिया जा रहा है.

पीठ ने यह टिप्पणी उस वक्त की जब याचिकाकर्ता एनाक्षी गांगुली की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हुजेफा अहमदी ने समिति की रिपोर्ट पर जवाब देने के लिए समय देने पर जोर दिया. याचिका में आरोप लगाया गया है कि संविधान के अनुच्छेद 370 के अधिकांश प्रावधान रद्द किए जाने के बाद जम्मू कश्मीर में नाबालिगों को भी नजरबंद किया गया है. पीठ ने कहा कि जम्मू कश्मीर में नाबालिगों की कथित नजरबंदी के बारे में याचिकाकर्ताओं को कोई शिकायत है तो वे राहत के लिए उचित मंच पर जा सकते हैं.