नई दिल्ली/ जयपुर: राजस्थान के जयपुर के रहने वाले गजानंद शर्मा 32 साल की उम्र में भटककर पाकिस्तान की सीमा पहुंच गए थे, लेकिन परिवार को तीन दशकों तक  येे भी पता नहीं चला सका कि वे कहां चले गए हैं और क्या वे अभी तक जिंदा हैं. परिवार को  उम्मीद भी नहीं थी कि वे कभी घर आएंगे. गजानंद की पत्नी मखनी देवी की एक ही ख्वाहिश थी कि अपने पति की एक झलक पा सके, जो 36 साल पहले अचानक एक दिन ला पता हो गए थे.

32 साल की युवास्था में गजानंद लापता हुए थे और अब वह 68 साल के हैं. ये एक ऐसा लंबा सफर रहा है. एक जो सीमा पार एक छोटी सी पैदल दूरी पर रहा लेकिन शायद ही कभी सबके सामने इसका सच आ पाता. फिर भी, ये ऐसी पैदल यात्रा थी, जिसे वह गजानंद पूरी जिंदगी याद रखेंगे. एक ऐसा जीवन जो संघर्ष से भरा हुआ रहा है और  उन्होंने एक दिन अपने प्रियजनों से लौटने मिलने की उम्मीद कभी नहीं खोई. 

जयपुर ब्रह्मपुरी इलाके में गजानंद की पत्नी मखनी देवी  अपने परिवार के साथ रहती हैं. पाकिस्तान ने सोमवार को अनेक भारतीयों नागरिकों के साथ गजानंद शर्मा को रिहा किया. मखनी देवी ने इस खबर को टीवी चैनलों पर अपने परिवार वालों के साथ देखा. जयपुर से सांसद रामचरण बोहरा ने गजानंद शर्मा के भारत पहुंचने की पुष्टि की.

gajnand-sharma-jaipur

परिवार की ये ख्वाहिश सोमवार को पूरी हो गई स्वतंत्रता दिवस से ठीक दो दिन पहले. ये तब हुआ है, जब पाकिस्तान की सरकार ने 29 भारतीयों को मानवीय आधार पर पंजाब के अटारी- बाघा बॉर्डर पर सोमवार को छोड़ा . इनमें 26 मछुआरे भी शामिल हैं.

इस साल के शुरुआत में गजानंद का जिंदा होना परिवार के लिए एक ऐसी खबर का आना था, जिसकी उन्हें उम्मीद नहीं थी. पाकिस्तान से जब जयपुर के ग्रामीण एसपी ऑफिस से सत्यापन के लिए कुछ दस्तावेज परिवार के पास आए तब, उन्हें गजानंद के बारे में पता चला. परिवार हैरत में पड़ गया, जब उनके पास पहुंची पुलिस ने बताया कि गजानंद लाहौर जेल में बंद रहा है. गजानंद के छोटे बेटे मुकेश शर्मा ने शेयर की गई फोटोज में से अपने पिता को पहचाना.

टीवी देख फफक पड़ी पत्नी
गजानंद ने सोमवार दोपहर वाघा अटारी सीमा के रास्ते भारत में प्रवेश किया. इस दृश्य को टीवी पर देख रही मखनी देवी अपनी भावनाओं पर काबू नहीं रख पाई और फफक पड़ीं. उन्होंने एक टीवी चैनल पर कहा कि वे इतने साल बाद भी अपने पति को पहचान सकती हैं.

हां, वह मेरे पति हैं लेकिन बहुत दुबले पतले हो गए हैं
मखनी ने कहा,’हां, वह मेरे पति हैं लेकिन वह बहुत दुबले पतले हो गए हैं. पाकिस्तान के कारण ही मेरे पति की यह खराब हालत है. जब वह लापता हुए थे तो वे पूरी तरह स्वस्थ थे.’ मखनी ने जिस व्यक्ति को अपने पति गजानंद के रूप में पहचाना वह बहुत ही कमजोर दिख रहे थे और ठीक ढंग से चल भी नहीं पा रहे थे. बीएसएफ के जवान उनकी मदद कर रहे थे.

जानना चाहती हूंं वे पाकिस्तान कैसे पहुंचे
परंपरागत रूप से सावन में पहने जाने वाली हरी लहरिया साड़ी पहने मखनी देवी ने कहा कि वे अपने पति को अपने सामने देखना चाहती हैं और उनके जयपुर पहुंचने का इंतजार है. उन्होंने कहा, ” वे उनसे जानना चाहेंगी वे पाकिस्तान कैसे पहुंचे. उनकी अनुपस्थिति के ये साल बहुत मुश्किल में गुजरे. उनके लिए मेरी उम्मीद हमेशा कायम रही.”

बेटे ने कहा-मां के लिए सबसे बड़ा उपहार 
गजानंद के छोटे बेटे मुकेश के अनुसार पिता की वापसी उनके परिवार के लिए एक सपना सच होने जैसा है. उन्होंने कहा कि हरियाली तीज पर उनकी मां के लिए यह सबसे बड़ा उपहार है. हरियाली तीज को भगवान शिव व देवी पार्वती के मिलन का उत्सव भी कहा जाता है. गजानंद के परिवार में उनकी पत्नी मखनी देवी के साथ साथ पुत्र राकेश व मुकेश शर्मा का भरा पूरा परिवार है.

सांसद रामचरण बोहरा ने पुष्टि की
जयपुर के सांसद रामचरण बोहरा ने कहा कि उन्होंने गजानंद को जयपुर लाने में मदद के लिए चार लोगों को वाघा सीमा पर भेजा है. उन्होंने कहा, ” मेरी अधिकारियों से बात हुई है जिन्होंने पुष्टि की कि गजानंद भारत आ चुके हैं. औपचारिकताएं पूरी करने के बाद वह एक दो दिन में जयपुर आएंगे.” उन्होंने कि मई में जयपुर ग्रामीण पुलिस अधीक्षक कार्यालय में गजानंद शर्मा की राष्ट्रीयता की पुष्टि संबंधी एक दस्तावेज आने पर ही इस परिवार को पता चला कि वह पाकिस्तान की जेल में बंद हैं.

(इनपुट- एजेंसी)