देश भर में जलीकट्टू को लेकर विवाद थमा नहीं है। अध्यादेश के बावजूद मदुरै में इसका आयोजन नहीं होगा। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक इसके लिए कोई स्थायी समाधान नहीं हो जाता वे साड़ों को काबू करने वाले इस खेल को शुरू नहीं करेंगे और प्रदर्शन जारी रखेंगे। Also Read - PM Kisan Samman Nidhi Scheme: सावधान! 33 लाख किसान मिले हैं फर्जी, तुरंत वापस कर दें पैसे, वरना...

तमिलनाडु के राज्यपाल सी. विद्यासागर राव ने कहा कि जल्लीकट्टू के लिए अध्यादेश जारी करने के बाद लगभग तीन साल के प्रतिबंध के बाद अब इसका फिर से आयोजन होने वाला है। राज्य के अलग अलग स्थानों पर इसका आयोजन होगा। Also Read - Elephant Death Viral Video: एक बार फिर जानवरों के साथ हैवानियत का मामला आया सामने, हाथी पर फेंका जलता हुआ टायर, हुई मौत

राज्य के मुख्यमंत्री ओ. पन्नीरसेलवम ने कहा कि अध्यादेश की जगह एक मसौदा विधेयक बगैर किसी बाधा के 23 जनवरी से शुरू हो रहे तमिलनाडु विधानसभा सत्र में पेश और स्वीकार किया जाएगा। इससे पहले दिन में मोदी ने कहा कि तमिलनाडु के लोगों की सांस्कृतिक आकांक्षाएं पूरी करने के लिए सारी कोशिशें की जा रही हैं। यह भी पढ़ें: राज्यपाल सी विद्यासागर ने लागू किया अध्यादेश, मुख्यमंत्री ओ पनीरसेल्वम करेंगे जल्लीकट्टू की शुरुआत Also Read - कोरोना वायरस से संक्रमित पाई गईं शशिकला, विक्टोरिया हॉस्पिटल की गईं रिफर

कार्यक्रम के मुताबिक मुख्यमंत्री  पन्नीरसेलवम कल सुबह 10 बजे जल्लीकट्टू का अलगनल्लूर में उद्घाटन करेंगे, जो इस ग्रामीण खेल के लिए प्रसिद्ध है। वहीं, मदुरै जिला कलेक्टर के. वीरा राघव राव ने कहा कि हर चीज तैयार है और लोग सरकार से हरी झंडी का इंतजार कर रहे हैं।

इस बीच, धर्मपुरी से लोकसभा सांसद अंबूमणि रामदॉस ने आज राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाकात की और जंतु निर्ममता निवारण अधिनियम 1960 में एक संसदीय संशोधन के जरिए जल्लीकट्टू के एक स्थायी हल की मांग की। उन्होंने कहा कि आपात स्थिति में लाया गया अध्यादेश सिर्फ एक अस्थायी हल है और इसे उच्चतम न्यायालय कभी भी रद्द कर सकता है।

उन्होंने बताया, ‘हमने केंद्र सरकार से यह भरोसा दिलाने को कहा है कि यदि न्यायालय कुछ समय बाद अध्यादेश को रद्द करता है तो वह संसद के आगामी सत्र में पीसीए अधिनियम में संशोधन करेगी।’