जल्लीकट्टू विवाद गहराता चला जा रहा है। सुप्रीम कोर्ट से बैन के बावजूद तमिलनाडु के मदुरै में 22 बैलों के साथ जल्लीकट्टू का आयोजन किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु के वकील को जमकर लताड़ लगाई है। इसके बाद डीएमके के एमके स्टालिन ने जल्लाकट्टू के आयोजन के लिए अपना भाषण दिया। स्टालिन ने कहा कि तमिलनाडु की परंपरा खतरे में है। इसे बचाने के लिए केंद्र सरकार को अध्यादेश लाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के विरोध में डीएमके पूरे तमिलनाडु में प्रदर्शन कर रही है। स्टालिन ने कहा कि इस मुद्दे पर सभी राजनीतिक पार्टियाँ एकजुट हैं। स्टालिन का भाषण उस वक्त आया जब सुप्रीम कोर्ट द्वारा पोंगल से पहले जल्लीकट्टू पर फैसला सुनाने की माँग को ठुकरा दिया गया।

क्या है जल्लीकट्टू और क्यों मचा है विवाद?

जल्लीकट्टू तमिलनाडु का एक परंपरागत खेल है, जिसमें बैल को काबू में किया जाता है। यह खेल काफी सालों से तमिलनाडु में लोगों द्वारा खेला जाता है। तमिलनाडु में मकर संक्रांति का पर्व पोंगल के नाम से मनाया जाता है। आंकड़ों के अनुसार 2010 से 2014 के बीच जल्लीकट्टू खेलते हुए 17 लोगों की जान गई थी और 1,100 से ज्यादा लोग जख्मी हुए थे। वहीं पिछले 20 सालों में जल्लीकट्टू की वजह से मरने वालों की संख्या 200 से भी ज्यादा थी। इस वजह से साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट ने प्रिवेंशन ऑफ क्रूअलटी टू एनिमल एक्ट के तहत इस खेल को बैन कर दिया था। पशु कल्याण की संस्था पेटा ने इस पर बैन लगाने की मांग की थी।

पेटा ने कहा कि जल्लीकट्टू बैलों को कष्ट देने के लिए नहीं

पशु कल्याण संस्था पेटा की मांग पर ही जल्लीकट्टू पर बैन लगाया गया था। अब पेटा ने टिप्पणी की है कि जल्लीकट्टू बैलों को कष्ट देने के लिए नहीं है। यह टिप्पणी सुप्रीम कोर्ट द्वारा पोंगल से पहले जल्लीकट्टू पर फैसला सुनाने की माँग ठुकरा देने के बाद आयी। शनिवार को जल्लीकट्टू का आयोजन होना है। सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में जल्लीकट्टू पर पशुओं के इस्तेमाल पर बैन लगाया था और इसके बाद पुनर्विचार याचिका भी खारिज कर दी थी।