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भाजपा की नयी दोस्त बनी पीडीपी फिलहाल उनकी मुश्किलें बढ़ा रही हैं। बता दे कि रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मौजूदगी में पीडीपी संस्थापक मुफ़्ती मोहम्मद सईद ने जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। सरकार बने आज दूसरा दिन हैं लेकिन मुफ़्ती की बयानबाजी भाजपा को सवालों के घेरे खड़ी कर रही हैं। विपक्ष लगातार भाजपा पर हमले बोल रहा हैं। यह भी पढ़े-मुफ़्ती के जहर उगलने वाले बयान से ‘मोदी सरकार’ ने किया किनारा, कहा सुरक्षा बलों की बदौलत हुआ चुनाव Also Read - बीएसएफ ने जम्मू-कश्मीर के सांबा में 150 मीटर लंबी सुरंग का पता लगाया

ज्ञात हो कि रविवार को शपथ लेने के बाद मुफ़्ती ने विवादित बयान देते हुए कहा था कि राज्य में सफलतापूर्वक चुनाव संपन्न कराने में, अलगाववादियों, पाकिस्तान पोषित आतंकवादियों का योगदान भी है। यह भी पढ़े- विवादित बयान के बाद भी कम नहीं हुई मुफ़्ती की हेकड़ी, कहा जो कह दिया वो कह दिया

हालांकि आज फिर उन्होंने अपने बयानों पर कायम रहने की बात तो दोहराई ही, साथ ही मीडिया को नसीहत दे दी कि वे राई का पहाड़ नहीं बनायें। इस बीच एक नयी खबर यह सामने आ रही है कि उनकी पार्टी के कुछ विधायकों ने मांग की है कि अफजल गुरु का शव उन्हें सौंपा जाये।

पीडीपी विधायक राजा मंजूर अहमद, मोहम्मद अब्बास वानी, यावर दिलावर वीर, ऐडवोकेट मोहम्मद यूसुफ, एजाज अहमद मीर और नूर मोहम्मद शेख ने संवेदनशील अफजल गुरु का मुद्दा उछाला है। इन विधायकों ने आतंकी अफजल गुरु के शव की मांग दोबारा की है। इन्होंने कहा कि हमारा अफजल गुरु पर जो स्टैंड पहले था वही आज भी है। हमने तब भी अफजल गुरु की फांसी के बाद शव की मांग की थी और अब भी हम उस पर कायम हैं। यह भी पढ़े- अफज़ल गुरु के गाँव में सिर्फ 6  लोगो ने डाला वोट

गौरतलब हैं कि अफजल गुरु पर संसद पर हमले का षड्यंत्र करने का आरोप था और उसे इसी आरोप में यूपीए – 2 की सरकार में सुशील कुमार शिंदे के गृहमंत्री रहते फांसी पर लटकाया गया था। लंबी कानूनी कार्रवाई के बाद उसे फांसी की सजा दी जा सकी। पीडीपी के इन विधायकों का कहना है कि अफजल गुरु की फांसी असंवैधानिक थी। इन्होंने इस फांसी को इंसाफ के साथ मजाक करार दिया। यह भी पढ़े-जम्मू-कश्मीर: मुख्यमंत्री बनते ही मुफ़्ती सईद ने उगला जहर, कहा आतंकियों और पाक की मदद से बना चुनावी माहौल

वही इस विवादित मुद्दे पर फिलहाल केंद्र ने चुप्पी साध ली है। सरकार को कुछ बोलते हुए नहीं बन रहा है।केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने इस संबंध में संसद परिसर में पत्रकारों के द्वारा बार-बार पूछे गये सवालों के जवाब में सिर्फ इतना कहा कि अभी हाउस चल रहा है, अभी हाउस चल रहा है।

ज्ञात हो कि 13 दिसंबर 2001 को संसद पर जैश-ए-मोहम्मद व लश्कर-ए-तैय्यबा नामक आतंकवादी गुटों ने हमला किया था। इस घटना में दिल्ली पुलिस के पांच जवान, सीआरपीएफ की महिला कांस्टेबल और दो सुरक्षा गार्ड शहीद हो गये थे। पुलिस के अनुसार, जैश-ए-मोहम्मद का आतंकी अफजल गुरु इस मामले का मुख्य साजिशकर्ता था।

कानूनी प्रक्रिया के बाद दिल्ली हाइकोर्ट ने 2002 में और फिर सुप्रीम कोर्ट ने 2006 में उसे फांसी की सजा सुनायी थी। उसने राष्ट्रपति के पास दया याचिका भी भेजी थी। जिसे खारिज कर दिया गया। नौ फरवरी 2013 को उसे दिल्ली के तिहाड़ जेल में फांसी पर लटकाया गया। यह भी पढ़े-जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री बने मुफ्ती मोहम्मद सईद, पीएम मोदी की मौजूदगी में ली शपथ

बता दे कि पाकिस्तान वाले बयान पर गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने लोकसभा में यह कहकर पल्ला झाड़ लिया कि भाजपा का मुफ़्ती के बयान से कोई लेना-देना नहीं है। विपक्ष ने इस बयान को मुद्दा बनाकर लोकसभा में खूब हंगामा किया और कहा कि प्रधानमंत्री को इसका सच देश के सामने रखना पड़ेगा।