श्रीनगर: कश्मीर में नगर निकाय चुनाव के तीसरे चरण का मतदान जारी है. घाटी में जिन 44 वार्डों में चुनाव हो रहे हैं उनमें 20 शहर के व्यावसायिक क्षेत्र में हैं. घाटी में 1989 में आतंकवाद के सिर उठाने के बाद से वहां मतदान का प्रतिशत आमतौर पर कम रहा है. उत्तरी कश्मीर के बारामूला जिले में उरी के 13 वार्डों में मतदान का प्रतिशत ऊंचा रहने की संभावना है जहां पारंपरिक रुप से उच्च मतदान होता रहा है. अनंतनाग में मट्टन क्षेत्र के वार्डों में ऐसा ही रुख नजर आ सकता है जहां कश्मीरी प्रवासियों की अच्छी खासी संख्या है. वैसे तो राज्य में तीसरे चरण में 207 वार्डों में चुनाव का कार्यक्रम है लेकिन 100 वार्डों में ही मतदान होगा. उनमें 56 जम्मू के सांबा जिले में और घाटी में 44 वार्ड हैं. Also Read - आखिर किस वजह से जम्मू-कश्मीर के कैदियों को आगरा जेल स्थानांतरित किया गया, जानें पूरी डिटेल्स

गौरतलब है कि दूसरे चरण में बुधवार को श्रीनगर नगर निगम के 19 वार्डों में से नौ में 100 से भी कम मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया. यह श्रीनगर में अब तक किसी भी चुनाव में हुआ सबसे कम मतदान रहा. राज्य निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के अनुसार नगर के 1.78 लाख मतदाताओं में से सिर्फ 2.3 प्रतिशत मतदाता मतदान के लिए घरों से बाहर आए. यह श्रीनगर शहर में किसी भी चुनाव में सबसे कम मतदान है. अप्रैल 2017 में श्रीनगर संसदीय क्षेत्र के लिए हुए उपचुनाव में मतदान प्रतिशत सात प्रतिशत से कुछ अधिक था. Also Read - केंद्र सरकार ने सिविल सर्विसेज का जम्मू-कश्मीर कैडर किया खत्म, अधिसूचना जारी कर AGMUT में किया विलय

बुधवार को नगर निगम के दूसरे चरण में, दो वार्डों-सैयद अली अकबर और टंकीपुरा में 10 से भी कम लोगों ने मतदान किया. टंकीपुरा के 10,371 मतदाताओं में से केवल आठ ने वोट डाले वहीं सैयद अली अकबर वार्ड के 7,784 मतदाताओं में से नौ ने मतदान किया. लवयपुरा में 6,385 मतदाताओं में से करीब 15 प्रतिशत ने मतदान किया वहीं जैनाकोट में 12,754 मतदाताओं में से 864 ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया.जम्मू कश्मीर में 13 साल के अंतराल के बाद शहरी स्थानीय निकायों के लिए चुनाव कराए जा रहे हैं. इससे पहले 2005 में इन निकायों के लिए चुनाव हुए थे. Also Read - जम्मू कश्मीर: 2020 में 87.13 प्रतिशत कम हुईं पत्थरबाजी की घटनाएं, DGP ने बताई वजह

नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां), पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) और माकपा ने उच्चतम न्यायालय में संविधान के अनुच्छेद 35ए को कानूनी चुनौती देने के विरोध में चुनावों का बहिष्कार किया है. सोमवार को हुये पहले चरण के मतदान में आतंकवादी समूहों की धमकियों के कारण अधिकतर लोग कश्मीर घाटी में मतदान केन्द्रों से दूर रहे. यहां महज 8.3 प्रतिशत मतदान हुआ जबकि राज्य के जम्मू और लद्दाख क्षेत्र में 65 प्रतिशत मतदान हुआ. चार चरण में होने वाले शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव में सोमवार को हुआ मतदान बड़े पैमाने पर शांतिपूर्ण रहा जिसका मुख्य क्षेत्रीय पार्टी नेशनल कांफ्रेंस (नेकां) और पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) ने बहिष्कार किया था.