नई दिल्ली। जम्मू कश्मीर में सरकार गिरने के बाद से ही महबूबा मुफ्ती की मुश्किलें खत्म होती नहीं दिख रही हैं. इसी के साथ पीडीपी का भविष्य भी अधर में दिखने लगा है. पीडीपी में लगातार फूट और विधायकों के पार्टी छोड़ने की खबरें आ रही हैं. पार्टी हाईकमान पर परिवारवाद को बढ़ावा देने का आरोप लग रहा है. बीजेपी के किनारा करने के बाद से पीडीपी को अपने विधायकों को एकजुट रखने में दिक्कतें आ रही हैं.

अंसारी का दावा, 14 विधायक पार्टी छोड़ने को तैयार

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, पीडीपी के नाराज नेता आबिद अंसारी ने दावा किया है कि 14 विधायक पार्टी छोड़ने को तैयार हैं. उनके इस बयान ने पीडीपी की चिंता बढ़ा दी है जो पहले ही कुछ विधायकों की नाराजगी झेल रही है. आबिद अंसारी और इमरान अंसारी ने पिछले हफ्ते ही पार्टी छोड़ने का ऐलान किया था. इनकी नाराजगी पार्टी में परिवार को बढ़ावा देने को लेकर है. महबूबा मुफ्ती ने अपनी सरकार में अपने भाई तसद्दुक सिद्दीकी को पर्यटन मंत्री बना दिया था.

परिवारवाद बढ़ाने का आरोप

बता दें कि मुफ्ती सरकार में मंत्री रह चुके इमरान अंसारी ने महबूबा पर आरोप लगाया था कि पीडीपी और बीजेपी गठबंधन उनकी अक्षमता की वजह से टूटा. इसके कुछ ही घंटे बाद विधायक मोहम्मद अब्बास वानी इमरान अंसारी के समर्थन में खड़े दिखे. उन्होंने कहा कि इमरान पूरी तरह सही हैं. इमरान के अंकल और विधायक आबिद अंसारी पहले ही महबूबा के खिलाफ बयान दे चुके हैं.

महबूबा की बीजेपी को चेतावनी, पीडीपी विधायकों को तोड़ने के होंगे गंभीर नतीजे

इमरान अंसारी ने आरोप लगाया था कि महबूबा ने सिर्फ पीडीपी को एक पार्टी के तौर पर ही फेल नहीं घोषित किया, बल्कि मुहम्मद सईद के सपने को भी तोड़ दिया. उन्होंने ये भी आरोप लगाया कि मुफ्ती भाई-भतीजावाद करती हैं. उन्होंने कहा कि गठबंधन की सरकार एक परिवार का शो बनकर रह गया था. इसे भाई, अंकल और रिश्तेदार चला रहे थे. पीपुल डेमोक्रेटिक पार्टी, फैमिली डेमोक्रेटिक पार्टी बनकर रह गई है.

बीजेपी के पास 25 विधायक

बता दें कि 89 सीटों वाले राज्य में बीजेपी के पास 25 विधायक हैं, जबकि पीडीपी के पास 28 विधायक हैं. दोनों ही पार्टी बहुमत के 45 के आंकड़े से काफी दूर हैं. बीजेपी ने पिछले महीने ही पीडीपी से गठबंधन तोड़ा है. बीजेपी ने देशहित में पीडीपी के साथ सरकार चलाने में असमर्थता जताई थी. बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने कहा था कि राज्य के तीनों इलाकों जम्मू, कश्मीर और लद्दाख का विकास नहीं हो पा रहा था. केंद्र सरकार की योजनाएं भी सही तरीके से लागू नहीं हो पा रही थीं.