नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल द्वारा विधानसभा भंग किए जाने के बाद चुनाव आयोग का कहना है कि राज्य में नए चुनाव छह माह के भीतर करवाए जाएंगे. हालांकि आयोग ने अगले साल निर्धारित लोकसभा के चुनाव के साथ जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव कराए जाने की संभावना से इंकार नहीं किया है. मुख्य निर्वाचन आयुक्त ओ पी रावत ने कहा कि जम्मू कश्मीर विधानसभा चुनाव मई से पहले करवाए जाने चाहिए…यह संसदीय चुनाव से भी पहले हो सकते हैं. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के अनुसार सदन को भंग किए जाने के छह माह की सीमा के भीतर चुनाव करवा लिए जाने चाहिए. इसलिए यह अवधि मई 2019 आती है. Also Read - राजस्थान भाजपा प्रमुख बोले- हम 75 हैं, पर कई विधायक हमसे जुड़ना चाहते हैं

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साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आयोग सभी पहलुओं पर विचार कर चुनाव तिथियों की घोषणा करेगा. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का निर्णय राष्ट्रपति द्वारा मांगी गई राय पर आया था. उन्होंने कहा कि चुनाव पहला मौका मिलते ही होना चाहिए जिसका अर्थ है कि छह माह से पहले भी हो सकता है. उन्होंने कहा कि तेलंगाना पर भी यही सिद्धान्त लागू होता है जहां विधानसभा को समय से पहले ही भंग कर दिया गया.

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जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने बुधवार देर शाम राज्य विधानसभा को भंग कर दिया था. इससे कुछ ही घंटे पहले पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की महबूबा मुफ्ती सईद ने नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस के सहयोग से सरकार बनाने का दावा राज्यपाल के समक्ष पेश किया था. उन्होंने 87 सदस्यीय विधानसभा में 56 विधायकों के समर्थन का दावा किया था. उसके कुछ ही समय बात पीपुल्स कांफ्रेंस नेता सज्जाद लोन ने भी सरकार बनाने का दावा पेश किया. लोन के पास दो विधायक हैं और उन्होंने भाजपा के 25 और 18 से अधिक अन्य विधायकों का समर्थन होने का दावा किया था.

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दूसरी ओर जम्मू कश्मीर में नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाने का दावा करने वाली पीडीपी का कहना है कि अभी इस बारे में फैसला नहीं गया है कि विधानसभा भंग करने संबंधी राज्यपाल के फैसले को अदालत में चुनौती दी जाएगी या नहीं. पीडीपी प्रवक्ता रफी अहमद मीर ने एक ट्वीट में कहा,‘केवल सूचना के लिए, जेकेपीडीपी ने अदालत का रूख किए जाने के मुद्दे पर औपचारिक रूप से कोई सहमति नहीं बनाई है. इस संबंध में कोई बैठक नहीं हुई है. मीर उन अटकलों पर प्रतिक्रिया व्यक्त कर रहे थे कि पार्टी राज्य विधानसभा भंग किए जाने संबंधी राज्यपाल के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दे सकती है.