नई दिल्ली: जम्मू कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में शुक्रवार को जुम्मे की नमाज के बाद हिंसा भड़क उठी. आरोप है कि श्रीनगर के नौहट्टा इलाके में शुक्रवार शाम को जुम्मे की नमाज के बाद केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की बंकर बंद गाड़ी पर पत्थरबाजी की गई जिसके बाद गाड़ी के नीचे आने से एक युवक की मौत हो गई और दो गंभीर रूप से घायल हो गए. केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह के कश्मीर दौरे से पहले एक बार फिर से घाटी में हिंसा शुरू हो गई है. राजनाथ सिंह 29 जून को शुरू होने वाली अमरनाथ यात्रा की तैयारियों और कश्मीर में शांति स्थापित करने के लिए सभी पक्षों से बातचीत करने जल्द ही कश्मीर आने वाले हैं.

कैसे हुआ हादसा?
घटना के बारे में एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि सीआरपीएफ की गाड़ी एक अधिकारी को छोड़ कर वापस आ रही थी. रास्ते में लोग पत्थरबाजी कर रहे थे जैसे ही सीआरपीएफ की गाड़ी पत्थरबाजों के सामने आई उन्होंने गाड़ी पर पत्थर बरसाना शुरू कर दिया. इसके बाद गाड़ी का ड्राइवर नर्वस हो गया और वहां से अपनी जान बचाकर भागने लगा जिसमें ये हादसा हो गया.

सोशल मीडिया पर वायरल
सोशल मीडिया पर इस घटना को लेकर तरह तरह की प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है. दोनों पक्षों की तरफ से तस्वीरें वायरल की जा रही हैं. तस्वीरों मे साफ दिख रहा है कि पत्थरबाज सीआरपीएफ की गाड़ी को घेरकर उसपर पत्थर बरसा रहे हैं और सीआरपीएफ की जिप्सी के अंदर बैठे सुरक्षाकर्मियों की जान लेने को उतारू हैं. वहां दूसरी तरफ कुछ तस्वीरों में देखा जा सकता है कि सीआरपीएफ की गाड़ी के नीचे कश्मीरी युवक दबा हुआ है.

विपक्ष का विरोध
घाटी में हुई इस घटना पर विपक्षी नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सरकार को घेरा है. ट्विटर पर मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती पर निशाना साधते हुए उमर अब्दुल्ला ने लिखा, ”प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पहले उन्होंने लोगों को जीप पर बांधकर सरेआम घुमाया और अब वो सीधे उनपर गाड़ी चढ़ा रहे हैं.”

उमर अब्दुल्ला के अलावा नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता जुनैद मट्टू ने भी इस घटना को लेकर सरकार पर निशाना साधा है. मट्टू ने कहा, ”सीआरपीएफ की गाड़ी के नीचे कश्मीरी युवक के दबे होने की तस्वीर बहुत ही भयावह है. हां ये सच है कि सीआरपीएफ की जिप्सी पर अटैक किया गया था. लेकिन ये लोकल पुलिस की गलती है कि उसने सीआरपीएफ की गाड़ी को ऐसे इलाके से जाने दिया जहां इतने सारे लोग मिलकर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे.”