नई दिल्ली: जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक अपने बयानों की वजह से चर्चा में हैं. जम्मू में वरिष्ठ कांग्रेसी नेता गिरधारी लाल डोगरा की 31वीं पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि देने पहुंचे राज्यपाल ने कहा कि उन्हें पद से तो नहीं हटाया जाएगा, लेकिन उन्हें नहीं पता कि उन्हें कब दूसरे राज्य में भेज दिया जाए. बता दें कि केंद्र के लिए असहज स्थिति पैदा करते हुए जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने शनिवार को कहा था कि अगर उन्होंने अपने हाल के फैसले के लिए दिल्ली से पूछा होता तो उन्हें सज्जाद लोन के नेतृत्व वाली सरकार बनवानी पड़ती और इतिहास में उन्हें एक ‘बेईमान आदमी’ के रूप में याद किया जाता.

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राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा कि मैं कितने दिन यहां हूं मुझे नहीं पात. पता नहीं कब मेरा तबादला कर दिया जाएगा. मुझे पद से नहीं हटाया जाएगा, लेकिन मेरे तबादले की आशंका है. जब तक मैं यहां हूं, मैं आप लोगों को भरोसा दिलाता हूं कि जब भी आप मुझे बुलाएंगे, मैं उन्हें (गिरधारी लाल डोगरा) श्रद्धांजलि देने के लिए आता रहूंगा.

पीडीपी के नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाने का दावा पेश करने के बाद मलिक ने पिछले सप्ताह अचानक जम्मू कश्मीर विधानसभा भंग कर दी थी. इसके बाद लोन की अगुवाई वाली दो सदस्यीय पीपुल्स कांफ्रेस ने भी भाजपा और अन्य दलों के 18 विधायकों के समर्थन से सरकार बनाने का प्रयास किया था. ग्वालियर के आईटीएम विश्वविद्यालय में एक कार्यक्रम में मलिक ने शनिवार को कहा था, ‘दिल्ली की तरफ देखता तो मुझे लोन की सरकार बनवानी पड़ती और मैं इतिहास में एक बेईमान इंसान के तौर पर देखा जाता.

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पत्रकार रवीश कुमार के अपने भाषण में खराब फैक्स मशीन का जिक्र किए जाने के बाद मलिक ने अपने संबोधन में कहा था कि जो कोई भी दोष निकालना चाहता है, अब निकाल सकता है लेकिन मैं आश्वस्त हूं कि मैंने जो किया, वह सही था. राज्यपाल ने कांग्रेस, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) और नेशनल कांफ्रेंस पर भी निशाना साधा थी और कहा था कि अगर वे सरकार बनाने के इतने ही इच्छुक थे तो उन्हें एक दिन पहले जम्मू आकर मुझसे मिलना चाहिए था. मलिक ने कहा कि उस दिन ईद की छुट्टी थी और यह एक त्यौहार का दिन होता है. क्या वे यह उम्मीद कर रहे थे कि राज्यपाल फैक्स मशीन के पास खड़े रहते और उनके फैक्स का इंतजार करते?’

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राज्यपाल ने कहा कि अगर पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती और नेकां नेता उमर अब्दुल्ला जम्मू कश्मीर में (गठबंधन करके) सरकार बनाने को लेकर गंभीर थे तो उन्हें मुझे फोन करना चाहिए था या चिट्ठी लिख सकते थे. मलिक ने कहा कि राज्य विधानसभा भंग करने के बाद, अब्दुल्ला और महबूबा ने खुशी जाहिर की और दावा किया कि वे यही चाहते थे. उन्होंने कहा कि मैं दिल्ली से शाम चार बजे लौटा और मुझे खुफिया अधिकारियों ने स्थिति से अवगत कराया. मुझे दिल्ली बात करने की जरूरत नहीं लगी क्योंकि दो दिन पहले मैं उन सभी से मिला था.