पठानकोट (पंजाब): जम्मू-कश्मीर के कठुआ में आठ वर्षीय बच्ची से गैंगरेप और उसकी हत्या के नृशंस मामले में 6 आरोपियों को सजा सुना दी गई है. इनमें से तीन आरोपियों को उम्र कैद की सजा सुनाई गई है. जबकि इनका साथ देने वाले तीन पुलिस वालों को 5-5 साल की सजा सुनाई गई है. मुख्य आरोपी सांझीराम, दीपक खजुरिया और प्रवेश कुमार को उम्र कैद की सुनाई गई है. इसके साथ ही दीपक खजुरिया पर एक लाख का जुर्माना भी लगाया गया है. इन आरोपियों का साथ देने वाले दो पुलिस अधिकारियों-उपनिरीक्षक आनंद दत्ता और हेड कॉन्स्टेबल तिलकराज और सुबूत नष्ट करने वाले सुरेंद्र वर्मा को 5-5 साल की सजा सुनाई गई है. मामले में सात आरोपी थे, लेकिन मुख्य आरोपी के बेटे को संदेह का लाभ देते हुए आज सुप्रीम कोर्ट ने दोपहर ही अदालत ने बरी कर दिया था. इसके बाद आज करीब 4 बजे घटना के 17 महीने बाद सेशन कोर्ट ने बाकी 6 आरोपियों को सजा सुनाई है.

अदालत ने परिसर के बाहर एकत्र मीडिया की नजर से दूर यह बहुप्रतीक्षित फैसला सुनाया गया है. वकीलों ने बताया कि जिस जगह अपराध हुआ, उस मंदिर की देखभाल करने वाले सांजीराम, विशेष पुलिस अधिकारी दीपक खजूरिया और आम नागरिक प्रवेश कुमार को दंड संहिता की आपराधिक षड्यंत्र, हत्या, सामूहिक बलात्कार और सबूत नष्ट करने संबंधी धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया. इसके बाद उसे सजा सुनाई गई. उन्होंने बताया कि दो पुलिस अधिकारियों-उपनिरीक्षक आनंद दत्ता और हेड कॉन्स्टेबल तिलकराज और एक विशेष पुलिस अधिकारी सुरेंद्र वर्मा को भी सबूत नष्ट करने का दोषी करार दिया गया है, इन्हें भी मिलाकर कुल 6 लोगों को सजा सुनाई गई है.

सजा सुनाए जाने से पहले अदालत में मांग की गई थी हत्या एवं सामूहिक बलात्कार के तीन दोषियों के खिलाफ मृत्युदंड दिया जाए. मालूम हो कि पिछले साल अप्रैल में दायर पंद्रह पृष्ठ के आरोपपत्र के अनुसार 10 जनवरी, 2018 को अगवा की गई आठ साल की बच्ची को कठुआ जिले में एक गांव के मंदिर में बंधक बनाकर रखा गया और उससे दुष्कर्म किया गया. उसे जान से मारने से पहले उसे चार दिन तक बेहोश रखा गया. जम्मू से करीब 100 किलोमीटर और कठुआ से 30 किलोमीटर दूर पड़ोसी राज्य पंजाब के पठानकोट में जिला एवं सत्र अदालत ने पिछले साल जून के पहले सप्ताह में इस मामले की रोजाना सुनवाई शुरू की थी.

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई जम्मू कश्मीर से बाहर किए जाने का आदेश दिया था. शीर्ष अदालत ने यह आदेश उस समय दिया था जब देश को हिलाकर रख देने वाले इस मामले में कठुआ में वकीलों ने अपराध शाखा के अधिकारियों को आरोपपत्र दाखिल करने से रोक दिया था.