श्रीनगर: जम्‍मू-कश्‍मीर में आर्टिकल 370 हटाने के 20 दिन बाद सिर्फ तिरंगा लहरा रहा है. रविवार को श्रीनगर स्थित सचिवालय से राज्‍य के झंडे को हटा लिया गया. अब इस केंद्र शासित राज्‍य में सिर्फ राष्‍ट्रीय ध्‍वज ही फहरा रहा है. केंद्र सरकार ने 5 अगस्त को अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधान हटाते हुए जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को दो अलग-अलग केन्द्रशासित प्रदेश बनाने का फैसला किया था.

श्रीनगर सचिवालय पर जम्मू-कश्मीर का झंडा और भारत का झंडा एकसाथ फहराते थे. आर्टिकल 370 के कारण जम्मू-कश्मीर का एक अलग झंडा था. लेकिन धारा 370 हटाए जाने के बाद 25 अगस्‍त से सचिवालय के भवन पर सिर्फ भारत का झंडा लहराते हुए दिख रहा है.

अनुच्छेद 370 के तहत जम्मू कश्मीर को अपना झंडा रखने की इजाजत थी जो लाल रंग का था, जिस पर खड़ी तीन सफेद पट्टियां और एक सफेद हल था. जम्मू कश्मीर के झंडे को तिरंगे झंडे के साथ प्रतिदिन सचिवालय पर फहराया जाता था. जम्मू कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू कश्मीर और लद्दाख में बांटने वाला कानून प्रभाव में आने के बाद राज्य के झंडे को 31 अक्टूबर को हटाया जाना था.

अधिकारियों ने बताया कि यद्यपि रविवार सुबह सचिवालय की इमारत के ऊपर केवल तिरंगा ही फहराया गया. उन्होंने बताया कि राज्य के झंडे को अन्य इमारतों से भी हटाया जाएगा. झंडे को राज्य संविधान सभा द्वारा सात जून 1952 को अपनाया गया था.

झंडे पर तीन पट्टियां राज्य के तीन क्षेत्रों जम्मू, कश्मीर और लद्दाख का प्रतिनिधित्व करती थीं.

केंद्र ने 5 अगस्त को संविधान के अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को समाप्त कर दिया था, जो कि जम्मू कश्मीर राज्य को निवास और सरकारी नौकरियों के लिए विशेष दर्जा प्रदान करते थे. संसद ने इस संबंध में प्रस्ताव को मंजूर किया और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने का विधेयक भी पारित कर दिया.

बाद में 9 अगस्त को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने जम्मू कश्मीर पुनर्गठन कानून, 2019 को मंजूरी प्रदान कर दी जो कि राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटता है और यह 31 अक्टूबर को अस्तित्व में आएगा. 5 अगस्त को कश्मीर घाटी के विभिन्न हिस्सों में लगी पाबंदियां अभी बरकरार है.

घाटी का दौरा करने जा रहे अल्पसंख्यक कार्य मंत्री ने मुख्तार अब्बास नकवी ने धारा 370 को लेकर कहा, ” एक चीज स्पष्ट है कि 370 हटा दिया गया है. अब 370 वापस नहीं आने जा रहा है, क्योंकि यह मोदी सरकार है. हर कोई जानता है कि यह सरकार पूरा सोचकर निर्णय करती है और इसमें फैसला होने के बाद पुनर्विचार (रीथिंक) नहीं होता है.

केंद्रीय मंत्री उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 370 के कारण शिक्षा, रोजगार, मानवाधिकार, अल्पसंख्यक और बाल अधिकार तथा अन्य विषयों से जुड़े 100 से अधिक कानून वहां लागू नहीं थे. इसलिए वहां के लोगों को भी यह अहसास हुआ कि 370 उनके विकास के रास्ते का बड़ा रोड़ा है.

राज्य के लोगों के अधिकारों और संस्कृति की सुरक्षा की जाएगी. नकवी ने कहा कि इस बार जम्मू-कश्मीर से करीब 12 हजार लोगों ने हज किया जो आजादी के बाद पहली बार हुआ है. मंत्रालय की यह पहल इस मायने में महत्वपूर्ण है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख अल्पसंख्यक बहुल हैं. कश्मीर मुस्लिम बहुल है तो लद्दाख में भी मुस्लिम और बौद्ध आबादी बहुसंख्यक है. जम्मू क्षेत्र में मुस्लिम समुदाय की अच्छी-खासी आबादी है और वहां सिख समुदाय के लोग भी रहते हैं.