Jammu-and-Kashmir-assembly-electionजम्मू कश्मीर में सरकार गठन को लेकर पीडीपी कहना है कि अभी इसमें और वक्त लगेगा और इसकी जानकारी वो राज्यपाल को देने वाली है। पीडीपी ने ये भी कहा है कि सरकार बनाने को लेकर बीजेपी से अब तक उनकी कोई आधिकारिक बातचीत नहीं हुई है.

हालांकि उमर अब्दुल्ला का कहना हैं कि पीडीपी माइंड गेम खेल रही है।
इस बीच सोनिया गांधी ने भी मुफ्ती मोहम्मद सईद को फोन पर जीत की बधाई दी है। इस फोन कॉल के कई मायने निकाले जा रहे हैं। माना जा रहा है कि कांग्रेस भी सरकार में सक्रिय भूमिका निभाना चाहती हैं। अगर ऐसा होता हैं तो यह बीजेपी के लिए बहुत बड़ा झटका साबित होगा।

पीडीपी नेताओ का मानना हैं कि 25 सीटें लेकर दूसरी सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी भाजपा के साथ गठबंधन करना क्षेत्रीय पार्टी के लिए आत्मघाती होगा। उन्होंने कहा कि सुशासन और विकास के लिए लोगों की एक सार्वभौमिक इच्छा होती है, लेकिन कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में लोग आपके मित्रों को भी उत्सुकता से देखते हैं। गौरतलब है कि नेशनल कान्फ्रेंस हमेशा उसी के साथ सरकार बनाती रही हैं जिसकी केंद्र में सरकार हो।

वही नेशनल कान्फ्रेंस के पास 15 सीटें हैं और वह सरकार के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। भाजपा के साथ गठबंधन की बातचीत होने की रिपोर्ट आम होने पर कुछ विधायकों के खुलेआम असंतोष जताए जाने के बाद वह दौड़ से हट गई। चुनाव परिणामों में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था। जम्मू-कश्मीर की 87 सदस्यीय विधानसभा में 12 विधायकों वाली कांग्रेस न तो सरकार बनाने की स्थिति में है और न ही 44 के आंकड़े को पार करने के लिए वह सरकार के गठन में पीडीपी या नेशनल कान्फ्रेंस की मदद करने योग्य है।

गौरतलब हैं कि कांग्रेस प्रवक्ता सलमान निजामी ने कल कहा कि पार्टी भाजपा को राज्य में सत्ता में आने से रोकने के लिए पीडीपी और छह निर्दलीय विधायकों के संपर्क में है। राज्य के राज्यपाल एनएन वोहरा ने सरकार गठन पर विचार के लिए पीडीपी और भाजपा को चर्चा के लिए अलग-अलग बुलाया है।

पीडीपी प्रवक्ता नईम अख्तर ने यह भी बताया कि सरकार गठन पर सभी पार्टियों से बातचीत चल रही है और मुफ्ती सईद फिलहाल दिल्ली नहीं जा रहे हैं।

सरकार बनाने को लेकर समीकरण क्या?
बता दे कि पीडीपी ने साफ कर दिया है कि सरकार बनाने को लेकर उसकी सभी पार्टियों से बात चल रही है। पीडीपी इस मामले में जल्दबाजी नहीं करना चाह रही है। फिलहाल पीडीपी कोर ग्रुप और राजनीतिक मामलों की कमेटी सरकार बनाने को लेकर विजन, पॉलिसी और प्रोग्राम पर चर्चा कर रही है। इस मामले में नीति तय होने के बाद ही मुफ्ती मोहम्मद सईद प्रधानमंत्री मोदी से मिलेंगे। सूत्रों के मुताबिक पीडीपी को बीजेपी के साथ जाने से जम्मू-कश्मीर में नुकसान का डर है।

भाजपा के सामने पीडीपी ने रखी पांच शर्तें।
1. स्वराज के प्रस्ताव का सम्मान हो (एलओसी पर नरमी बरती जाए)
2. जम्मू कश्मीर के शांतिपूर्ण इलाकों से एएफएसपीए हटाया जाए।
3. धारा 370 जैसे मुद्दों को किनारे रखा जाए।
4. मुफ्ती मुहम्मद सईद पूरे 6 साल तक मुख्यमंत्री रहेंगे।
5. बाढ़ पीड़ितों के लिए ठोस आर्थिक पैकेज।

इस बीच बीजेपी महासचिव राम माधव ने कहा है कि सूबे में अगले सरकार के गठन में बीजेपी की अहम भूमिका होगी। फिलहाल सरकार बनाने पर चर्चा हो रही है। राम माधव ने यह भी माना कि जनादेश पीडीपी और नेशनल कॉन्फ्रेंस के पक्ष में है। फिलहाल चर्चा हो रही है, अभी कुछ कह पाना जल्दबाजी होगी।