नई दिल्ली: सोमवार को एक बार आतंकवादियों ने जम्मू कश्मीर में अशांति फैलाने की कोशिश की. जम्मू कश्मीर के श्रीनगर में सुरक्षा बलों और आतंकवादियों के बीच सोमवार सुबह मुठभेड़ हुई. मुठभेड़ में लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के शीर्ष आतंकी सैफ-उल-लाह सहित दो आतंकवादी मारे गए. यह जानकारी पुलिस ने दी. आतंकवादियों और सुरक्षाबलों के बीच मुठभेड़ तब शुरू हुई, जब सेना ने इलाके की घेराबंदी की और तलाशी अभियान शुरू किया. जैसे ही सुरक्षा बल उस स्थान पर पहुंचे, जहां आतंकवादी छिपे हुए थे, आतंकवादियों ने अंधाधुंध गोलीबारी करनी शुरू कर दी, जिसके बाद मुठभेड़ शुरू हो गई. Also Read - VIDEO: सुरक्षाबलों ने कहा...छोटे बाहर आ जा, कोई गोली नहीं मारेगा, सुनकर रोने लगा आतंकी

जम्मू कश्मीर के डीजीपी दिलबाग सिंह ने कहा कि पिछले पांच दिनों में जम्मू कश्मीर में चार अलग अलग ऑफरेशन में कुल 10 आतंकवादी मारे गए हैं. उन्होंने बताया कि एक आतंकवादी को जिंदा पकड़ा गया है जिससे पूछताछ चल रही है. Also Read - जम्मू कश्मीर के अनंतनाग जिले में मुठभेड़, सुरक्षाबलों ने एक आतंकी को मार गिराया

श्रीनगर में पत्रकारों से बातचीत में पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) दिलबाग सिंह ने कहा कि सैफ-उल-लाह एक पाकिस्तानी आतंकवादी था जो पूर्व में सुरक्षाबलों पर हुए तीन बड़े हमलों में शामिल रह चुका है. Also Read - भाजपा ने जम्मू-कश्मीर की सभी पार्टियों को एक मंच पर ला दिया, हम अनुच्छेद 370 को वापस लाएंगे: सज्जाद लोन

उन्होंने कहा, “वह बडगाम में एक सीआरपीएफ पार्टी पर हमले में शामिल था, जिसमें सीआरपीएफ के असिस्टेंट सब इंस्पेक्टर (एएसआई) शहीद हो गए थे. कंदिजल में हुए एक दूसरे हमले में, सीआरपीएफ के दो जवान शहीद हो गए थे और तीन अन्य घायल हो गए थे और कंदिजल में तीसरा हमला एक काफिले पर हुआ था, जिसे नाकाम कर दिया गया था.”

उन्होंने कहा कि सुरक्षा बलों ने इस साल अब तक 75 आतंकवाद-रोधी अभियान चलाए हैं, जिनमें 180 आतंकवादी मारे गए हैं. इस वर्ष के दौरान कुल 138 आतंकवादी और उनके सहयोगी गिरफ्तार किए गए हैं.

उन्होंने कहा कि इस साल आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई में कुल 19 पुलिसकर्मी, 21 सीआरपीएफ जवान और सेना के 15 जवान शहीद हुए हैं. उन्होंने कहा कि इस वर्ष के दौरान अब तक, श्रीनगर शहर में आठ मुठभेड़ें हुई हैं, जिनमें 18 आतंकवादी मारे गए हैं.

उन्होंने आगे कहा कि लश्कर और अन्य संगठन शहर में पैर जमाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन जब भी वे शहर में पैर जमाने में सक्षम हुए हैं, खुफिया नेटवर्क के कारण सेना उन्हें ढूंढ़ निकालने में कामयाब रही है.