बेंगलुरु: कर्नाटक में कांग्रेस-जनता दल (सेक्‍यूलर) गठबंधन की सरकार बचाने के लिए रविवार को सारा दिन सियासी घटनाक्रम तेजी से चला. एक ओर मुख्‍यमंत्री एचडी कुमार स्‍वामी अधूरी विदेश यात्रा छोड़कर दिल्‍ली होते हुए स्‍पेशल प्‍लेन से बेंगलुरु पहुंचे, जहां उन्‍होंने अपनी पार्टी की मीटिंग की. वहीं, दूसरी ओर कांग्रेस के सीनियर नेता बीजेपी पर बयानों से हमले करते रहे और इस्‍तीफा दे चुके विधायकों को मनाने की कोशिश करते नजर आए. वहीं, बीजेपी अभी भी वेट एंड वॉच की पॉलिसी पर चलती दिख रही है.

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13 महीने पुरानी सरकार को बचाने के लिए जेडीएस जहां कांग्रेस के पूर्व मुख्‍यमंत्री सिद्धरमैया को सीएम बनाने के रुख पर कुछ नरम दिखाई दे रही है. वहीं, कांग्रेस अपने नाराज विधायकों को मंत्री पद के लिए आश्‍वस्‍त करने के संकेत दे रही है. लेकिन कांग्रेस और जेडीएस नेताओं की इस सारी कवायद का दारोमदार इस्‍तीफा देकर मुंबई में ठहरे 13 विधायकों पर है. इन विधायकों की ओर से अभी बिलकुल भी नरमी नहीं दिखाई दे रही है. एक विधायक ने कहा कि बेगलुरु लौटने या इस्‍तीफा वापस करने का सवाल ही नहीं है. हम सभी एकजुट हैं. वहीं, जेडीएस के नेता ने दावा किया एक विधायक से लौटने के लिए कहा है तो वह तैयार हैं.

बेंगलुरु में जेडीएस नेता टीजी देवेगौड़ा ने सिद्धरमैया को सीएम बनाने के सवाल पर कहा, यदि को-ऑर्डिनेशन कमेटी तय करती है कि सिद्धरमैया को सीएम होना चाहिए तो हमें कोई आपत्ति नहीं है. कांग्रेस सरकार बचाने की कोशिश कर रही है. उन्‍होंने कुछ सीनियरों से मंत्री पद से इस्‍तीफा देने के लिए और दूसरों के लिए रास्‍ता निकाला है. जीटी देवेगौड़ा ने बेंगलुरु में स्‍थित पार्टी मुख्‍यालय जेपी भवन में कहा, मैंने एच विश्‍वनाथ से कहा, उन्‍होंने कहा कि वह वापस आ जाएंगे. अगर दोनों पार्टियां सिद्धरमैया को सीएम या किसी और को जेडीएस या कांग्रेस से, मैं इसके साथ हूं.

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कांग्रेस व जनता दल (एस) की संकट से निबटने के लिए बातचीत की
कर्नाटक में सत्तारूढ़ जनता दल (एस)-कांग्रेस गठबंधन के एक दर्जन से अधिक विधायकों के इस्तीफे से उत्पन्न संकट के एक दिन बाद इससे निपटने के लिए दोनों दलों के नेतागण अगले कदम को लेकर गहन विचार विमर्श कर रहे हैं. इस बैठक को अहम माना जा रहा है, क्योंकि खबरें आ रही हैं कि आने वाले कुछ दिनों में कुछ और विधायक इस्तीफा दे सकते हैं.

देवेगौड़ा के निवास पर चलती रहीं मीटिंग
उधर पार्टी प्रमुख देवेगौड़ा के निवास पर जनता दल (एस) खेमे की बैठकों का सिलसिला बना हुआ है. राज्य के पार्टी प्रमुख एचके कुमारस्वामी ने कहा कि इस बैठक में मौजूदा राजनीतिक घटनाक्रम पर चर्चा की गई. जिन तीन विधायकों ने इस्तीफे दिए हैं, उन्हें मनाकर त्यागपत्र वापस लेने के लिए समझाने बुझाने के प्रयास किए गए. सरकार के संकटमोचक माने जाने वाले कांग्रेस के शिवकुमार ने गौड़ा से उनके घर पर मुलाकात करके राजनीतिक हालात के बारे में चर्चा की.

13 विधायकों के इस्‍तीफे से संकट
कांग्रेस-जद (एस) सरकार उस समय संकट में घिर गई जब गठबंधन के 13 विधायकों ने त्यागपत्र दे दिया. इनमें से 12 लोगों ने शनिवार को ही इस्तीफा दे दिया था.

घटनाक्रम पर नजर रखे हुए भाजपा
विपक्षी भाजपा ने कहा है कि वह घटनाक्रम पर नजर रखे हुए है और उसने इशारा किया कि पार्टी सरकार बनाने के सभी विकल्पों को
देख रही है. अपने 10 विधायकों के त्यागपत्र देने से सकते में आई कांग्रेस के विधायक दल के नेता सिद्धरमैया ने मंगलवार को एक
बैठक बुलाई है, जिसमें मौजूदा सियासी चुनौतियों और 12 जुलाई से शुरू हो रहे राज्य विधानसभा के सत्र को लेकर विचार विमर्श
किया जाएगा.

बीजेपी के पास 105 विधायक
भाजपा की राज्य इकाई के प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येद्दियुरप्पा ने कहा कि पार्टी राजनीतिक घटनाक्रम पर नजर रखे हुए है
और पार्टी संन्यासी नहीं है कि वह सरकार बनाने की संभावना से इनकार कर दें. उन्होंने कहा गठबंधन सरकार को अच्छा प्रशासन देने
दें. पर अगर वे ऐसा नहीं कर पाते तो हम 105 विधायकों के साथ मौजूद हैं. भाजपा न तो राज्यपाल से मिलेगी और न ही दिल्ली
जाएगी.

सरकार बनाने के लिए 113 विधायक चाहिए से 105 तक गणित
सरकार बनाने के लिए कम से कम 113 विधायकों का समर्थन चाहिए और अगर ये त्यागपत्र स्वीकार हो जाते हैं तो गठबंधन के
विधायकों की संख्या 105 रह जाएगी. राज्य की 224 सदस्यीय विधानसभा में सत्तारूढ़ गठबंधन के 118 विधायक हैं. अगर त्यागपत्रों
को स्वीकार कर लिया जाता है तो सरकार के बहुमत खोने का संकट आ सकता.  (इनपुट: एजेंसी)