नई दिल्लीःजम्मू-कश्मीर में सत्तारुढ़ पीडीपी-बीजेपी सरकार ने राज्य के वित्त मंत्री हसीब द्राबू को सोमवार को मंत्रिपरिषद से हटा दिया. द्राबू ने नई दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान टिप्पणी की थी कि कश्मीर एक राजनीतिक मुद्दा नहीं है. जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने ने राज्यपाल एनएन वोहरा को एक पत्र लिख कर द्राबू को मंत्रिपरिषद से हटाने की सिफारिश की है. गौरतलब है कि द्राबू ने शुक्रवार को नई दिल्ली में एक कार्यक्रम में कहा था कि जहां तक मुझे लगता है, यह ( जम्मू कश्मीर) एक राजनीतिक मुद्दा नहीं है.

क्या कहा था हसीब द्राबू ने
एक कार्यक्रम में वित्त मंत्री हसीब द्राबू ने कश्मीर के लोगों को संबोधित करते हुए कहा था कि कश्मीर का मुद्दा राजनीतिक नहीं बल्कि सामाजिक है. द्राबू ने कहा कि उनके राज्य को संघर्षग्रस्त प्रदेश या राजनीतिक समस्या के रूप में नहीं बल्कि सामाजिक मुद्दों वाले एक समाज के रूप में देखा जा ना चाहिए. लोगों को राज्य की स्थिति की शुरुआत और प्रवृति के बारे में आत्मचिंतन करना चाहिए और विचार करना चाहिए कि इसका हल कैसे हो सकता है. उन्होंने कहा कि हमें दूसरे से बातचीत करने से पहले अपनेआप से बात करने की आवश्यकता है और यह राष्ट्रीय स्तर पर भी होना चाहिए.

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70 साल से राजनीति की बात पर गलत विचार हो रहा है
वित्त मंत्री ने कहा कि राज्य के लोगों की चिंताओं को शामिल करने की आवश्यकता है ना कि संकेतों के जंगल में खो जाने की. हसीब द्राबू ने कहा कि जम्मू-कश्मीर को संघर्षग्रस्त राज्य और राजनीतिक मुद्दे के रूप में नहीं देखें. यह एक समाज है जहां अभी सामाजिक मुद्दे हैं. हम अपनी जगह खोजने का प्रयास कर रहे हैं और हम एक ऐसी प्रक्रिया से गुजर रहे हैं, जिससे कई अन्य देश भी गुजर रहे हैं. उन्होंने कहा कि जहां तक मैं देख सकता हूं यह (जम्मू-कश्मीर) राजनीतिक मुद्दा नहीं है. वे लोग पिछले 50 या 70 साल से इसकी राजनीति की बात कर गलत विचार रख रहे हैं, कि राजनीतिक स्थिति कभी नहीं सुधरी है.

पीडीपी ने मांगा था स्पष्टीकरण
द्राबू के इस बयान को अनुशासनहीनता और पार्टी विरोधी मानते हुए नेतृत्व ने उन्हें एक नोटिस जारी करते हुए इस बारे में उनका जवाब मांगा था. बताया जा रहा है कि इस नोटिस के बाद द्राबू ने सोमवार को शीर्ष नेतृत्व को अपना जवाब भेजा था. रविवार को हसीब द्राबू के बयान के बाद पीडीपी के उपाध्यक्ष सरताज मदनी ने उनसे इस बयान पर अपना स्पष्टीकरण देने की अपील की थी. इस दौरान उन्होंने कहा था ‘पीडीपी कश्मीर के विषय को एक राजनीतिक मुद्दा मानती है और पार्टी ने अपनी स्थापना के वक्त से ही इस मुद्दे को बातचीत के जरिए हल करने पर जोर दिया है. ऐसे में वरिष्ठ नेताओं को पार्टी के कोर एजेंडे से जुड़े किसी विषय पर बयान देते समय थोड़ा सतर्क रहने की जरूरत है.