जम्मू: केंद्र के लिए असहज स्थिति पैदा करते हुए जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने कहा है कि अगर उन्होंने अपने हाल के फैसले के लिए दिल्ली से पूछा होता तो उन्हें सज्जाद लोन के नेतृत्व वाली सरकार बनवानी पड़ती. मलिक ने कहा कि ऐसा होता तो इतिहास में उन्हें एक ‘बेईमान आदमी’ के रूप में याद किया जाता.Also Read - J&K DDC Election Results 2020: घाटी में लोकतंत्र की जीत, सबसे बड़ी पार्टी बनी भाजपा, मिलीं 74 सीटें

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पीडीपी के नेशनल कॉन्‍फ्रेंस और कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाने का दावा पेश करने के बाद मलिक ने पिछले सप्ताह अचानक जम्मू कश्मीर विधानसभा भंग कर दी थी. इसके बाद लोन की अगुवाई वाली दो सदस्यीय पीपुल्स कॉन्‍फ्रेस ने भी भाजपा और अन्य दलों के 18 विधायकों के समर्थन से सरकार बनाने का प्रयास किया था. Also Read - जम्मू कश्मीर: बुधवार आधी रात से लागू हो जाएगा राष्ट्रपति शासन, केंद्र लेगा नीतिगत फैसले

ग्वालियर के आईटीएम विश्वविद्यालय में एक कार्यक्रम में मलिक ने शनिवार को कहा, ‘‘दिल्ली की तरफ देखता तो मुझे लोन की सरकार बनवानी पड़ती और मैं इतिहास में एक बेईमान इंसान के तौर पर देखा जाता.’’ पत्रकार रवीश कुमार के अपने भाषण में खराब फैक्स मशीन का जिक्र किये जाने के बाद मलिक ने अपने संबोधन में कहा, ‘‘जो कोई भी दोष निकालना चाहता है, अब निकाल सकता है लेकिन मैं आश्वस्त हूं कि मैंने जो किया, वह सही था.’’

राज्यपाल ने कांग्रेस, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) और नेशनल कॉन्‍फ्रेंस पर भी निशाना साधा और कहा कि अगर वे सरकार बनाने के इतने ही इच्छुक थे तो उन्हें एक दिन पहले जम्मू आकर मुझसे मिलना चाहिए था. मलिक ने कहा, ‘‘उस दिन ईद की छुट्टी थी और यह एक त्यौहार का दिन होता है. क्या वे यह उम्मीद कर रहे थे कि राज्यपाल फैक्स मशीन के पास खड़े रहते और उनके फैक्स का इंतजार करते?’’ उन्होंने कहा, ‘‘अगर पीडीपी नेता महबूबा मुफ्ती और नेकां नेता उमर अब्दुल्ला जम्मू कश्मीर में (गठबंधन करके) सरकार बनाने को लेकर गंभीर थे तो उन्हें मुझे फोन करना चाहिए था या चिट्ठी लिख सकते थे.’’

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मलिक ने कहा कि राज्य विधानसभा भंग करने के बाद अब्दुल्ला और महबूबा ने खुशी जाहिर की और दावा किया कि वे यही चाहते थे. उन्होंने कहा, ‘‘मैं दिल्ली से शाम चार बजे लौटा और मुझे खुफिया अधिकारियों ने स्थिति से अवगत कराया. मुझे दिल्ली बात करने की जरूरत नहीं लगी क्योंकि दो दिन पहले मैं उन सभी से मिला था.’’ राज्यपाल ने कहा कि दिल्ली से बिना किसी सलाह या निर्देश या चर्चा के उन्होंने विधानसभा भंग करने का फैसला किया. मलिक ने कहा कि राज्य संविधान के अनुसार, उन्हें राष्ट्रपति या संसद से अनुमति की जरूरत नहीं होती है.

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नेकां और पीडीपी के पाकिस्तान के निर्देश पर गठबंधन सरकार बनाने के प्रयास संबंधी भाजपा की टिप्पणियों पर मलिक ने कहा कि वह फारूक अब्दुल्ला और उमर अब्दुल्ला पर आरोप नहीं लगा सकते. मलिक ने कहा कि वे शेख अब्दुल्ला के बच्चे हैं जिन्होंने ‘‘भारत को चुना’’ और वे राष्ट्रवादी हैं. उन्होंने कहा, ‘‘मुफ्ती सईद भारतीय थे और कोई उनके राष्ट्रवाद पर संदेह नहीं कर सकता और ना ही किसी को उनकी बेटी के राष्ट्रवादी होने पर संदेह है.’’

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राज्यपाल ने कहा कि लोन कह रहे हैं कि उन्होंने व्हाट्सएप पर अपना पत्र मुझे भेजा था और मुफ्ती ने कहा कि उन्होंने सरकार बनाने का दावा ट्वीट करके पेश किया. उन्होंने कहा, ‘‘मुझे यह नहीं पता था कि सरकारें व्हाट्सएप और ट्वीट संदेश पर बनती हैं. सरकार बनाने का दावा व्हाट्सएप पर पेश नहीं होता है.’’ मलिक ने कहा, ‘‘मैं बीते 15 दिन से ये यह देख रहा था. मुझे भरोसा था कि किसी के पास बहुमत नहीं है. अगर मैंने किसी एक पक्ष को बुलाया होता तो बहुत बड़ा विवाद हो जाता. धन का इस्तेमाल होता और इससे अव्यवस्था फैल जाती.’’

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भाजपा के समर्थन वापस लेने के बाद पीडीपी-भाजपा गठबंधन सरकार गिर गई थी और 19 जून को राज्य में छह महीने के लिए राज्यपाल शासन लागू हुआ था. राज्य विधानसभा को निलंबित कर दिया गया था ताकि राजनीतिक दल नई सरकार बनाने की संभावनाएं तलाश सकें.