नई दिल्ली: जामिया मिल्लिया इस्लामिया के छात्र संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने के लिए शुक्रवार को विश्वविद्यालय के मुख्यद्वार के बाहर एकत्र हुए. इससे एक ही दिन पहले एक व्यक्ति ने वहां प्रदर्शनकारियों के एक समूह पर एक पिस्तौल से गोली चलाई थी, जिसमें एक छात्र घायल हो गया था. विश्वविद्यालय के बाहर एकत्र छात्रों ने ‘घृणा पैदा करने वाले भाषण बंद करो’ और ‘तमंचे पे डिस्को, जामिया से खिसको’ के पोस्टर पकड़ रखे थे. प्रदर्शनकारियों ने छात्रों पर हमले की निंदा करते हुए कहा कि पुलिस की भारी मौजूदगी के बीच एक व्यक्ति के दिन दिहाड़े गोलियां चलाने से वे स्तब्ध हैं.

प्रदर्शन में शामिल एक छात्र ने कहा, ‘‘मुझे जब गोली चलाए जाने के बारे में पता चला, तो मैं यह जानने के लिए अपने मित्रों के साथ परिसर की ओर भागा कि वहां क्या हुआ है. हम शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना चाहते थे. हम करीब दो महीने से यहां प्रदर्शन कर रहे हैं. मुझे निश्चित ही लगता है कि पुलिस इससे अधिक तेजी से कार्रवाई कर सकती थी.’’ एक व्यक्ति द्वारा सीएए विरोधी प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाए जाने के बाद विश्वविद्यालय के पास हजारों लोग और पुलिसकर्मी आमने-सामने आ गए थे. व्यक्ति के गोलियां चलाने के कारण एक छात्र घायल हो गया था. घटना के बाद उक्त व्यक्ति पिस्तौल हवा में लहराते और यह चिल्लाते हुए निकला था कि ‘‘ये लो आजादी.’’ रात होने के साथ ही क्षेत्र में व्यापक प्रदर्शन शुरू हो गया था. आंदोलनकारी छात्र और विश्वविद्यालय के पास जमा अन्य सैकड़ों लोगों ने अवरोधक तोड़ दिये थे और वे पुलिसकर्मियों से भिड़ गए थे.

विश्वविद्यालय तथा पुलिस अधिकारियों के अनुसार जामिया मिल्लिया इस्लामिया विश्वविद्यालय के बाहर शुरू हुआ प्रदर्शन पुलिस द्वारा हिरासत में लिए गए चार लोगों को रिहा किए जाने के बाद समाप्त हो गया. प्रदर्शन में शुक्रवार को भाग ले रहे एक अन्य छात्र ने कहा कि यह बात हैरान करने वाली है कि किस प्रकार उनके शांतिपूर्ण मार्च को बाधित करने की हमेशा कोशिश की जाती है. उसने कहा, ‘‘हम पिछले दो महीने से शांतिपूर्वक प्रदर्शन कर रहे हैं. हम गुरुवार को एक शांतिपूर्ण मार्च के लिए राजघाट की ओर बढ़ रहे थे जहां हमें मानव श्रृंखला बनानी थी.’’ छात्र ने कहा, ‘‘पुलिस ने कई चौराहों पर पहले ही अवरोधक बना रखे थे. हम इन अवरोधकों को शांतिपूर्वक पार करना और अपने गंतव्य की ओर बढ़ना चाहते थे.’’

जामिया नगर निवासी एक रिक्शाचालक मोहम्मद इब्राहीम ने कहा कि छात्र प्रदर्शन कर रहे हैं लेकिन यह शांतिपूर्वक किया जा रहा है. उसने कहा, ‘‘जब मुझे पता चला कि एक व्यक्ति ने छात्रों पर गोली चलाई हैं, उस समय मैं पास ही रिक्शा चला रहा था. बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी मौजूद रहने के बावजूद हमें महसूस होता है कि यहां हमारे लिए सुरक्षा चिंता का एक बड़ा विषय बन गया है.’’ छात्रों ने कहा कि वे राजनीतिक दलों को इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन का फायदा नहीं उठाने देंगे. ऐसी संभावना है कि जुमे की नमाज के बाद और भी छात्र यहां प्रदर्शन में शामिल होंगे.

जामिया में प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ एकजुटता प्रकट करने और शाहीन बाग में प्रदर्शन कर रहीं महिलाओं को समर्थन देने के लिए देहरादूर से यहां आए मोहम्मद आसिफ एवं उसके भाई मोहम्मद उस्मान ने कहा कि कुछ तत्व शांतिपूर्ण प्रदर्शनों को बाधित करना चाहते हैं.