नई दिल्ली: प्रमुख मुस्लिम संगठन जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में ‘इस्लामी आतंकवाद’ से जुड़ा पाठ्यक्रम शुरू करने के कथित फैसले की आलोचना करते हुए मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से इस मामले में दखल की मांग की. जमीयत के महासचिव मौलाना महमूद मदनी ने एक बयान में कहा,‘हमने मानव संसाधन विकास मंत्री, जेएनयू के कुलपति एम जगदीश कुमार और कुलाधिपति विजय कुमार सारस्वत को पत्र लिखा है. हमने स्पष्ट किया है कि इस्लाम को आतंकवाद से जोड़कर पेश करने के षडयंत्र को स्वीकार नहीं किया जा सकता. Also Read - CBSE ने शुरू किया ऑनलाइन टीचर ट्रेनिंग प्रोग्राम, चार हजार से अधिक अध्यापकों ने सीखे पढ़ाई के तौर तरीके

‘मुसलमानों को आहत करने वाला कदम’
उन्होंने कहा,‘विश्वविद्यालय प्रशासन ने अपने इस कदम से देश के मुसलमानों को आहत करने का काम किया है. भारतीय मुसलमानों ने हमेशा शांति का समर्थन किया और देशप्रेम दिखाया है. हमने तो आतंकवाद के खिलाफ फतवा जारी किया है. दुनिया भर में सक्रिय आतंकी संगठन भारत में पैर पसार नहीं सके और इसकी वजह सिर्फ और सिर्फ भारतीय मुसलमानों का शांतिप्रिय और देशप्रेमी होना है. खबरों के मुताबिक बीते शुक्रवार को जेएनयू की 145वीं ऐकडेमिक काउंसिल की बैठक में ‘इस्लामी आतंकवाद’ से जुड़ा पाठ्यक्रम शुरू करने का फैसला किया गया. जेएनयू छात्रसंघ ने इसका विरोध किया है. Also Read - HRD मिनिस्ट्री ने शुरू की एक नई पहल, छात्रों को ऑनलाइन दी जा रही है फिटनेस क्लास 

माकपा ने की अालोचना
वहीं माकपा ने भी देश में उच्च शिक्षण संस्थानों में बीजेपी सरकार की दखलंदाजी को शिक्षा प्रणाली के लिए खतरनाक बताते हुए दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में ‘इस्लामिक आतंकवाद’ पर नया कोर्स शुरु करने के प्रस्ताव को वापस लेने की मांग की है. माकपा पोलित ब्यूरो की सोमवार को हुई बैठक में शैक्षणिक पाठ्यक्रमों को धार्मिक आधार पर बदलने, कर्नाटक चुनाव, पेट्रोल डीजल की कीमत, त्रिपुरा, पश्चिम बंगाल और असम में राजनीतिक हिंसा तथा जम्मू कश्मीर में संघर्षविराम के मुद्दों पर पारित प्रस्ताव में केन्द्र सरकार की नीति का विरोध किया गया. Also Read - अब रेड जोन में भी खुलेंगे सीबीएसई के रीजनल सेंटर, गृह मंत्रालय से मिली मंजूरी, लेकिन यह होगी शर्त

प्रस्ताव वापस लेने की मांग
पार्टी महासचिव सीताराम येचुरी ने कहा कि जेएनयू में व्यापक विरोध के बावजूद ‘इस्लामिक आतंकवाद’ पर कोर्स शुरु करने का विश्वविद्यालय की अकादमिक परिषद का प्रस्ताव देश की एकता और अखंडता के लिये खतरा है. पोलित ब्यूरो ने इस प्रस्ताव को तत्काल वापस लेने की मांग की. पोलित ब्यूरो का मानना है कि भाजपा सरकार का शिक्षा व्यवस्था पर लगातार हमला जारी है. इसके तहत भारतीय इतिहास के पाठ्यक्रमों में पौराणिक कथाओं को शामिल करने के अलावा केन्द्रीय विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों को सांप्रदायिक रंग देना शामिल है.