नई दिल्ली: दिल्ली सरकार ने शुक्रवार को अदालत से कहा कि 2016 जेएनयू राजद्रोह मामले में पुलिस ने ‘गुपचुप तरीके’ से और ‘जल्दीबाजी’ में आरोपपत्र दाखिल किया है और कन्हैया कुमार तथा अन्य के खिलाफ मुकदमा चलाने की अनुमति देने के संबंध में फैसला लेने के लिए सरकार को एक महीने से ज्यादा वक्त लगेगा. Also Read - दिल्ली सरकार मजदूरों को घर बैठे ऐसे दे रही है दो हजार से दो लाख रुपये, जानिए कैसे ले सकते हैं

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दिल्‍ली की आप सरकार ने मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट दीपक शहरावत की अदालत में दी गई दलील में आरोप लगाया कि पुलिस ने सक्षम अधिकारी से अनुमति लिए बगैर बेहद जल्दीबाजी में और गुपचुप तरीके से आरोपपत्र दाखिल कर दिया. अदालत ने पहले राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि वह मुकदमा चलाने की अनुमति देने के संबंध में स्पष्ट समय सीमा के साथ ‘उचित जवाब’ दाखिल करे.

JNU राजद्रोह: दिल्ली सरकार ने कन्हैया पर मुकदमा चलाने की अनुमति देने को मांगा एक महीने का समय

नौ फरवरी 2016 का मामला
दिल्ली पुलिस ने अदालत से पहले कहा था कि इस मामले में कुमार और अन्य के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए अधिकारियों की मंजूरी मिलनी बाकी है और इसे मिलने में दो से तीन महीने का समय लग सकता है. पुलिस ने कुमार और अन्य के खिलाफ अदालत में आरोपपत्र दायर करते हुए कहा था कि वह नौ फरवरी 2016 में जेएनयू परिसर में हुए समारोह में निकाले गए जुलूस का नेतृत्व कर रहा था और उसने राजविरोधी नारों का समर्थन किया था.

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