नई दिल्ली। दिल्ली का जवाहर लाल यूनिवर्सिटी एक बार फिर चर्चा में है. अटेंडेंस के मुद्दे पर जेएनयू में छात्रों ने वीसी और स्टाफ को बंधक बना लिया है. ये हंगामा सुबह 11 बजे से चल रहा है. छात्रों ने अटेंडेंस के मुद्दे पर एडमिनिस्ट्रेटिव ब्लॉक को घेर लिया और घेराव अब तक जारी है. जेएनयू प्रशासन ने कहा है कि अगर छात्रों ने घेराव खत्म नहीं किया तो पुलिस बुलाई जाएगी. जेएनयू रजिस्ट्रार ने छात्रों से घेराव खत्म करने की अपील की है. उन्होंने अपील की कि छात्र अधिकारियों को घर जाने दें.

वहीं, छात्रों का दावा है कि उन्होंने वीसी और बाकी अधिकारियों को बंधक नहीं बनाया है. इनका कहना है कि हम वीसी से मिलना चाहते हैं. हम सुबह से इंतजार कर रहे हैं. हमने कोई गेट बंद नहीं किया है, हम  सिर्फ उनका इंतजार कर रहे हैं.

कक्षा में उपस्थिति अनिवार्य करने के मुद्दे पर कुलपति के साथ बैठक की मांग कर रहे जेएनयू छात्रों ने गुरुवार को विश्वविद्यालय के प्रशासनिक ब्लॉक का घेराव किया और मुख्य प्रॉक्टर कौशल कुमार और रेक्टर-1 चिंतामणि महापात्र को भवन से जाने नहीं दिया. जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (जेएनयूएसयू) के नेतृत्व में सैकड़ों छात्रों ने भवन के सभी द्वार के बाहर धरना दिया और बाहर जाने की कोशिश कर रहे विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों को रोककर विरोध जताया. कुलपति एम जगदीश कुमार अपने कार्यालय में थे.

ये भी पढ़ें- JNU ने रद्द किया सुब्रमण्यन स्वामी का कार्यक्रम, राम मंदिर पर था लेक्चर

छात्रों ने मांग की कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रवृत्ति और फेलोशिप के लिए एक अकादमिक सत्र के दौरान आवश्यक 75 प्रतिशत की उपस्थिति अनिवार्य करने के फैसले को बदले और अनिश्चित काल तक के लिए रद्द की गई अकादमिक परिषद की बैठक आयोजित करे. सुबह 11 बजे से छात्रों के एक समूह ने नाटक और मूक अभिनय किया और प्रशासनिक ब्लॉक के मुख्य द्वार के पास गीत भी गाए. छात्रों को भवन में घुसने से रोकने के लिए सुरक्षा गार्ड तैनात किए गए थे. इस दौरान छात्रों ने भवन के पास मानव श्रृंखला भी बनाई.

सुबह प्रशासन को लिखे पत्र में जेएनयूएसयू ने कहा कि विश्वविद्यालय के छात्र जेएनयूएसयू के प्रतिनिधियों की कुलपति से बातचीत का इंतजार कर रहे हैं. जेएनयूएसयू के संयुक्त सचिव शुभांशु सिंह ने कहा कि प्रशासनिक भवन की घेराबंदी का कोई आह्वान नहीं किया गया है और प्रशासनिक कार्य बिना किसी बाधा के जारी है. जब तक कुलपति छात्रों से नहीं मिल लेते तब तक घेराव जारी रहेगा. छात्रों द्वारा वहां से जाने से रोके जाने के बाद रेक्टर-1 महापात्रा ने कहा कि वह व्यक्तिगत क्षमता के आधार पर इस मामले पर कोई फैसला नहीं ले सकते और इसके लिए छात्रों के साथ बातचीत होगी.

(भाषा इनपुट के साथ)