नई दिल्ली. देश के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालयों में से एक जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में कल यानी शुक्रवार को छात्रसंघ का चुनाव होना है. इससे पहले हर बार की तरह इस साल भी बुधवार की रात जेएनयू छात्र संघ (JNUSU) चुनाव के मद्देनजर जोश से ओत-प्रोत यूनिवर्सिटी कैंपस में प्रेजिडेंशियल डिबेट का आयोजन किया गया. डिबेट में छात्रसंघ चुनाव के लिए मैदान में खड़े विभिन्न छात्र संगठनों के उम्मीदवारों ने आरोप लगाया कि कैम्पस में ‘राष्ट्र विरोधी’ तत्व मौजूद हैं और देश ‘लिंचिस्तान’ में तब्दील हो रहा है. उम्मीदवारों ने छात्रों का समर्थन पाने के लिए एक से बढ़कर एक तर्क रखे. बुधवार की आधी रात करीब साढ़े 11 बजे शुरू हुई डिबेट अहले सुबह तक चली. इस दौरान सैकड़ों की संख्या में विद्यार्थी मौजूद थे. वहीं, कई मीडिया संस्थानों के पत्रकार भी डिबेट में पहुंचे थे.

अपने भाषण में संयुक्त वाम पैनल के उम्मीदवार और इस दौड़ में सबसे आगे एन. साई बालाजी ने केंद्र सरकार की नीतियों पर जमकर प्रहार किया. बालाजी ने कहा, ‘भीड़ को लोगों को मारने और चले जाने की अनुमति दी गई और उनके पास आरएसएस, केंद्र सरकार तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का समर्थन है. देश लिंचिस्तान में तब्दील हो रहा है.’ बालाजी ने डिबेट में अपनी बात रखते हुए कहा, ‘नोटबंदी नाकाम हो गई, वादे के मुताबिक नौकरियां नहीं है और उच्च शिक्षा पर लगातार हमला हो रहा है.’ इधर, भाजपा की छात्र इकाई एबीवीपी के उम्मीदवार ललित पांडे ने विश्वविद्यालय परिसर में राष्ट्रविरोधी तत्वों के होने के मुद्दे पर अपनी बातें रखीं. पांडे ने आरोप लगाया कि कैम्पस में ‘राष्ट्र विरोधी’ तत्व हैं और उन्होंने वादा कि अगर वह चुनाव जीते तो उन्हें ‘ठिकाने’ लगा देंगे.

राष्ट्रीय जनता दल की छात्र इकाई ने इस साल पहली बार जेएनयूएसयू चुनाव में अपना उम्मीदवार उतारा है. उसके उम्मीदवार जयंत कुमार ने कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई के प्रत्याशी विकास यादव की तरह उच्च शिक्षा के लिए फंडिंग कम करने, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में सीटों की संख्या कम करने तथा उसकी आरक्षण नीति में छेड़छाड़ करने को लेकर केंद्र पर निशाना साधा. बिरसा अंबेडकर फुले छात्र संघ के अध्यक्ष पद के प्रत्याशी थल्लापेल्ली प्रवीन ने कहा कि उनकी पार्टी कैम्पस के शोषित वर्गों के छात्रों की आवाज का प्रतिनिधित्व करती है. प्रवीन ने छात्रों से वाम और दक्षिण पंथ से इतर सोचने के लिए कहा.

JNU में प्रेजीडेंशियल डिबेट की रही है परंपरा
नियमित प्रचार के अलावा जेएनयूएसयू चुनावों में उम्मीदवार प्रेजीडेंशियल डिबेट में अपने एजेंडे के बारे में भाषण देते हैं, जो सवाल-जवाब के एक चरण के बाद होता है. यह कार्यक्रम अमेरिका की प्रेजीडेंशियल डिबेट की तर्ज पर आयोजित किया जाता है. छात्र संघ के चुनाव में यह डिबेट निर्णायक साबित होती है. माना जाता है कि प्रेजीडेंशियल डिबेट में अपनी बात को दमदार तरीके से रखने वाला उम्मीदवार ही JNUSU के सर्वोच्च पद पर पहुंचता है. बीते कुछ वर्षों में JNU की छात्र राजनीति को लेकर देशभर में चर्चा होती रही है. यही वजह है कि इस बार के JNUSU के चुनावों पर देशभर की मीडिया की नजरें टिकी हुई हैं.