डिलिवरी बॉय से अंडरवर्ल्ड डॉन, हैरतअंगेज है अबु सलेम की कहानी

साल 1998 में अबु सलेम ने दाऊद का पूरी तरह से साथ छोड़ दिया और जुर्म की दुनिया में अपना खुद अलग गिरोह बनाया.

Published date india.com Updated: June 16, 2017 4:24 PM IST
Abu Salem

मुंबई। मुंबई में सिलसिलेवार तरीके से 1993 में हुए बम धमाकों के मामलों में अदालत ने शुक्रवार को अपना फैसला सुनाते हुए 6 आरोपियों को दोषी पाया. टाडा कोर्ट ने एक आरोपी को बरी कर दिया . अबु सलेम पर हथियारों और एक्सल्लोसिव की सप्लाई के अलावा और संजय दत्त के घर एके-47 गन रखने के अलावा, कई हथियार घटना स्थल तक पहुंचाने के आरोप थे. 1993 ब्लास्ट से पहले सलेम ने गुजरात के भरूच से एक्सप्लोसिव मुंबई तक पहुंचाया और सलेम इन धमाकों की एक अहम कड़ी था.

एक साधारण इंसान से कुख्यात डॉन बनने तक का अबु सलेम का सफर बेहद दिलचस्प और हैरतअंगेज है. सलेम के पिता पेशे से वकील थे. उसका जन्म एक छोटे से गांव में हुआ. वह पहले एक मैकेनिक बना फिर ड्राइवर और डिलिवरी बॉय. लेकिन कैसे वह एक दिन डॉन बन गया. जानिए उसकी जिन्दगी का अब तक सफर…

आजमगढ़ में जन्म, मैकेनिक का काम

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के सराय मीर गांव में साल 1969 में एक छोटे से परिवार में अबु सलेम का जन्म हुआ. सलेम का पूरा नाम अबु सलेम अब्दुल कय्यूम अंसारी है. सलेम अपने चार भाइयों में सबसे बड़ा है. उसके पिता पेशेवर वकील थे जिनकी सड़क दुर्घटना में मौत हो गई.  घर की माली हालत के चलते अबु ने बीच में ही पढ़ाई छोड़ दी और मैकेनिक की दुकान पर काम करने लगा.

दिल्ली-मुंबई में चलाई टैक्सी

मैकेनिक का काम करने के बाद जल्द ही उसने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की ओर रुख किया. दिल्ली आने पर सलेम काफी दिनों तक टैक्सी चालक के रूप में करता रहा, लेकिन कुछ समय बाद ही वह मुंबई चला गया. सलेम ने यहां भी बतौर टैक्सी ड्राइवर काम शुरू किया. यहां सलेम ने टैक्सी चलाने के अलावा फेरीवालों और डिलिवरी बॉय की तरह भी काम किया.

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दाऊद से मुलाकात

1989 के दरमियां बतौर टैक्सी ड्राइवर सलेम की मुलाकात अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम से हुई. शुरूआती मुलाकात सालम-दुआ तक ही सीमित रही, लेकिन धीरे-धीरे सलेम और दाऊद के बीच नजदीकियां बढ़ीं और वह डी-कंपनी में शामिल हो गया. जल्द ही उसकी गिनती दाऊद के सबसे खास लोगों में होने लगी. वह दाऊद के लिए जमीन के सौदे और हथियारों की सप्लाई के काम देखने लगा.

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डी-कंपनी का मुख्य गुर्गा बना

1990 के आते-आते सलेम ने दाऊद इतना भरोसा जीत लिया कि दाऊद ने डी-कंपनी का पूरा जिम्मा सलेम को सौंप दिया. इसके बाद अबु ने दाऊद के इशारों पर फिल्मी सितारों, बड़े कारोबारियों और बिल्डरों से जबरन वसूली करना शुरू कर दिया. कुछ सालों तक सलेम दाऊद के इशारों पर काम करता रहा लेकिन साल 1997 में दाऊद की सहमति के बिना उसने गुलशन कुमार की गोली मारकर हत्या कर दी. यहीं से दोनों के बीच खटास बढ़ना शुरू हो गई.

डी-कंपनी छोड़ बनाया खुद का गिरोह

साल 1998 में अबु सलेम ने दाऊद का पूरी तरह से साथ छोड़ दिया और जुर्म की दुनिया में अपना खुद अलग गिरोह बनाया. रिपोर्ट्स की मानें तो सलेम ने दुबई में अपना किंग्स ऑफ कार ट्रेडिंग नाम से एक बिजनेस भी शुरू किया. इस दौरान सलेम ने कई सारे स्टेज शो ऑर्गेनाइज किए जिसमें फिल्म जगत की कई दिग्गज हस्तियां हिस्सा लेती थीं. इसी दौरान सलेम की मुलाकात मोनिका बेदी से हुई थी.

निजी जीवन

सलेम की पहली शादी समीरा जुमानी से हुई, पहली बीवी से सलेम के दो बच्चे थे. कुछ सालों बाद ही सलेम और समीरा के बीच अनबन के बाद तलाक हो गया. इस समय सलेम की पहली पत्नी समीरा जुमानी अमेरिका के जॉर्जिया शहर में रह रही है. इसके कुछ समय बाद ही सलेम और फिल्म अभिनेत्री मोनिका बेदी की मुलाकातों की चर्चा आम हो गई.

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मोनिका को देखते ही फिदा हो गया था सलेम

करीबियों का कहना है कि सलेम मोनिका बेदी को देखते ही उस पर फिदा हो गया और उसे अपने साथ लेकर विदेश फरार हो गया. इस दौरान सलेम ने दावा किया कि साल 2000 में लॉस एंजिलिस की एक मस्जिद में मोनिका बेदी के साथ उसने निकाह किया है. हालांकि मूल रूप से पंजाब के होशियारपुर जिले के चब्बेलाल गांव की रहने वाली मोनिका ने इससे इन्कार करते हुए कहा था कि मैं सलेम के साथ रही हूं लेकिन हमारा निकाह नहीं हुआ.

पुर्तगाल से सशर्त गिरफ्तारी

1993 ब्लास्ट सहित कई अन्य आरोंपो से घिरे सलेम को 20 सितंबर, 2002 को इंटरपोल की मदद से पुर्तगाल में मोनिका बेदी के साथ गिरफ्तार किया गया. मोनिका को अबु सलेम के साथ साल 2002 में इसे पुर्तगाल से भारत लाया गया था. इसके बाद 2005 में पुर्तगाल से प्रत्यर्पण करवा कर भारत लाया गया। अबु सलेम और मोनिका बेदी को फर्जी वीजा के चलते पुर्तगाल में गिरफ्तार कर लिया गया था. फर्जी पासपोर्ट मामले में भोपाल की मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी (सीजेएम) की अदालत ने चार साल कैद की सजा सुनाई थी. इसके साथ ही उस पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी ठोका गया था.

सलेम के ऊपर लगे ये संगीन आरोप

साल 1992 में अबू सलेम पर बॉलीवुड अभिनेता संजय दत्त को हथियार, विस्फोटक और उनके घर एके-47 सहित कई हथियार रखने के आरोप लगे.

1993 मुंबई: 13 धमाके, 257 मौत

सभी आरोपों में से सबसे बड़ा आरोप साल 1993  में सिलसिलेवार तरीके से हुए बम धमाकों का था, जिसे 24 सालों तक चली कानूनी लड़ाई के बाद अदालत ने शुक्रवार को सही पाया. इस धमाके में 257 लोग मारे गए और 700 से ज्यादा लोग बुरी तरह जख्मी हो गए थे. मुख्य आरोपी दाऊद इब्राहिम और टाइगर मेमन थे. दोनों दुबई फरार हो गए और फिर वहां से पाकिस्तान.

Probe in 1993 Mumbai blasts conducted without evidence, claims former Supreme Court judge

Probe in 1993 Mumbai blasts conducted without evidence, claims former Supreme Court judge, Getty.

कई हत्याओं को दिया अंजाम

अबु सलेम पर एक बिल्डर ओमप्रकाश कुकरेजा की हत्या करने का भी आरोप है. जब पुलिस ने बम धमाकों के संदिग्ध लोगों की खोज शुरू की तो अबू सलेम देश छोड़ कर फरार हो चुका था. 1997 में अबू सलेम ने संगीतकार गुलशन कुमार की हत्या की. इतना ही नहीं इसके अलावा फिल्म निर्देशक राजीव राय और राकेश रोशन की हत्या करने के प्रयास करने का आरोप था. रिपोर्ट्स के मुताबिक दाऊद ने सलेम को गुलशन कुमार की हत्या नहीं करने के लिए चेताया था, लेकिन सलेम नहीं माना जिसके बाद दोनों के बीच काफी कहासुनी हुई और सलेम ने अपनी अलग गैंग बना ली.

मनीषा कोयराला की सेक्रेटरी की हत्या

1998 में सलेम पर मनीषा कोयराला से फिरौती मांगने और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगा. पैसे न मिलने पर सलेम ने मनीषा कोयराला की सेक्रेटरी की गोली मारकर हत्या करवा दी थी. रिपोर्ट्स की मानें तो साल 2000 में अबु सलेम ने मिल्टन प्लास्टिक्स के मालिक रैंसम के अपहरण की भी योजना बनाई थी जिसके एवज में फिरौती के तौर पर 3 करोड़ रुपए की मांग की थी.

कई फिल्मी हस्तियों को मारने की योजना

2001 में बांद्रा में सलेम के चार गुर्गे पुलिस से हुई मुठभेड़ के दौरान मारे गए. ये सभी लोग आशुतोष गोवारिकर और झामू सुगंध को मारने की योजना बना रहे थे. साल 2002 में अबु सलेम के दो गैंगस्टर्स ने फिल्म डायरेक्टर लॉरेंस डिसूजा पर भी गोलियां दागीं लेकिन किस्मत से उनकी जान बच गई.

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