नई दिल्ली: क्षेत्रीय समग्र आर्थिक भागीदारी (आरसेप) के तहत 15 देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते से भारत के बाहर रहने के फैसले पर संघ की आर्थिक मामलों से जुड़ी संस्था स्वदेशी जागरण मंच और भाजपा नेताओं ने प्रधानमंत्री मोदी की तारीफ की है. उन्होंने कहा है कि एक बार फिर साबित हुआ कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय हितों से किसी तरह का समझौता नहीं हो सकता. भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने सोमवार को कहा, “आरसेप पर हस्ताक्षर नहीं करने का भारत का निर्णय सभी परिस्थितियों में राष्ट्रीय हितों को सुनिश्चित करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मजबूत नेतृत्व और संकल्प का परिणाम है. यह हमारे किसानों, एमएसएमई, डेयरी, विनिर्माण क्षेत्र, दवा, इस्पात और रासायनिक उद्योगों के लिए लाभदायक होगा.”

अमित शाह ने एक और ट्वीट कर पूर्व की यूपीए सरकार पर निशाना भी साधा. उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा, “कमजोर यूपीए सरकार में भारत के व्यापारिक हितों की रक्षा नहीं होती थी, मगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ऐसा कोई समझौता नहीं करता, जिसमें भारत के हितों की किसी भी तरह से अनदेखी होती है.”

उधर, भाजपा के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने भी ट्वीट कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्णय की सराहना की. उन्होंने ट्वीट कर कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मजबूत व ऐतिहासिक निर्णय लेने के लिए बधाई कि उन्होंने भारत के हितों में आरसेप समझौते में शामिल न होने का निर्णय लिया. वह हमेशा किसान, डेयरी सेक्टर, विनिर्माण, एमएसएमईज को के हितों को ध्यान में रखते हैं.”

दूसरे ट्वीट में जेपी नड्डा ने कहा, “भारत वैश्विक दबाव के आगे नहीं झुका. यूपीए की तरह कमजोर व्यापार समझौते के जरिए भारत ने बाजार का दरवाजा नहीं खोला. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फिर भारत के हितों की रक्षा दिखाई है.”

उधर, आरएसएस से जुड़कर आर्थिक क्षेत्र में काम करने वाले संगठन स्वदेशी जागरण मंच ने भी मोदी सरकार के फैसले को बहादुरी भरा निर्णय बताया है.

संगठन के सह संयोजक अश्वनी महाजन ने आईएएनएस से कहा, “अंतराष्ट्रीय दबावों के आगे घुटने न टेककर मोदी सरकार ने राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा की है. प्रधानमंत्री मोदी का यह निर्णय मेक इन इंडिया, डेयरी, मैन्यूफैक्च रिंग, एग्रीकल्चर आदि इंडस्ट्रीज के हितों की रक्षा करेगा. स्वदेशी जागरण मंच लगातार इसका विरोध कर रहा था. प्रधानमंत्री मोदी ने भी इस व्यापार समझौते से घरेलू उद्योगों को भारी नुकसान देखकर इससे दूर रहने का सराहनीय फैसला किया.”

बैंकाक में सोमवार को आरसेप के तहत मुक्त व्यापार समझौते के लिए 16 देशों के शीर्ष नेताओं की बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत के इसमें शामिल न होने की बात कही. उन्होंने कहा कि समझौता का मौजूदा प्रारूप भारत के हितों के अनुरूप नहीं है. दरअसल, इस समझौते के बाद सस्ते आयात से घरेलू उद्योगों की कमर टूटने का खतरा था. इसको लेकर संघ का संगठन स्वदेशी जागरण मंच लगातार विरोध जता रहा था.

(इनपुट आईएएनएस)