नई दिल्ली: हमारे देश में साधु संतों के बारे में ज्यादातर जानकारियां सबसे ज्यादा कुंभ के मेले या किसी खास पर्व के दिन ही मिलती हैं. ऐसे में इन दिनों भारत में जूना अखाड़ा एक बार फिर चर्चा में आ चुका है. जूना अखाड़ा के दो साधुओं व उनके एक ड्राइवर को महाराष्ट्र के पालघर में भीड़ द्वारा लाठी व लोहे के रॉड्स से पीट-पीटकर हत्या कर दी गई. इस मामले पर देश भर में राजनीति गर्म है. योगी आदित्यनाथ ने भी उद्धव ठाकरे से इस बाबत कड़ी कार्रवाई करने की मांग की. वहीं उद्धव ठाकरे ने फौरन मामले का संज्ञान लिया और 110 लोगों को हिरासत में ले लिया गया. लेकिन सोचने वाली बात यह है कि आखिर जूना अखाड़ा को लेकर राजनीति इतनी गर्म क्यों होने लगी है. तो हम आपको आज जूना अखाड़ा से जुड़ी सभी जानकारियां देने वाले हैं. Also Read - पालघर लिंचिंग: CID ने 18 आरोपियों को किया अरेस्‍ट, अब तक 134 लोग गिरफ्तार

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यहां 52 परिवारों के अहम सदस्यों की एक कमेटी बनाई जाती है. ये लोग ही अखाड़े के सभापति का चयन करते हैं. एक बार इस पद पर चयनित होने के बाद यह पद जीवनभर के लिए चुने हुए संत का हो जाता है. यहां साधुओं के परिवारों व समाज से जुड़े सभी प्रकार के निर्णय लिए जाते हैं. यह सभी फैसले नागा साधु लेते हैं. अक्सर आपने सुना होगा कि कुंभ के मेले में किसी अखाड़े के प्रमुख का चयन किया गया है. यह चुनावी प्रक्रिया कुंभ के दौरान ही की जाती है. Also Read - अब बुलंदशहर में दो साधुओं की हत्या, मंदिर परिसर में हुई वारदात, सीएम योगी ने मांगी रिपोर्ट

अखाड़े का निर्माण आखिर क्यों?

जूना अखाड़े के संत कुश्ती और युद्धकौशल में माहिर होते हैं. भारत में पहले कई आक्रमण हो चुके हैं. ऐसे में आदिगुरु शंकराचार्य ने कई संतों का एक समूह बनाया और इन्हें लेकर एक मठ की स्थापना की. इस मठ के लोगों को जूना अखाड़ा कहा गया. इन लोगों को इक्ट्ठा कर इस मठ को बनाने का प्रमुख उद्देश्य आक्रमणकारियों का सामना करना था. साथ ही हिंदू धर्म की रक्षा हेतु भी अखाड़ा के संतों को तैयार किया जाता. शंकराचार्य का मानना था कि अस्त्र-शस्त्र व कुश्ती की शिक्षा मन को मजबूत बनाती है, इस कारण इन मठों में युद्धस्तर की दीक्षा भी दी जाने लगी.

हिंदू धर्म की रक्षा

अखाड़े का अर्थ यहां मल्लयुद्ध व कुश्ती से है. इसी अखाड़े से देश में हिंदू धर्म के अलग अलग अखाड़ों की शुरुआत हुई. यहां पर विचार विमर्श भी किया जाता है. भारत में हिंदू धर्मों के सात प्रमुख अखाड़े हैं. इनमें- जूना, निरंजनी, महानिर्वाणी, अटल, आनंद, आवाहन और अग्नि अखाड़ा प्रमुख अखाड़ों में से एक हैं. इन अखाड़ों का प्रमुख उद्देश्य हिंदू धर्म की रक्षा व धर्म से जुड़ी चीजों को रक्षा करना था. साथ ही बाह्य आक्रमणकारियों से अन्य धर्मों के लोगों को बचाना भी इस अखाड़े का मुख्य उद्देश्य था.

अखाड़े का प्रमुख

हिंदू मान्यताओं की मानें तो साधु-संतों को कुछ अखाड़ों में विभाजित किया गया है. जूना अखाड़ा इनमें से ही एक है. इन अखाड़ों को हिंदू धर्म गुरु आदि शंकराचार्य ने बनाया है. जूना अखाड़ा को साधु संतों का सबसे बड़ा अखाड़ा माना जाता है. इसमें संतों की संख्या लाखों में है. नागा साधु जूना अखाड़ा में सबसे ज्यादा पाए जाते हैं. इस अखाड़े के प्रमुख आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरी जी महाराज है. इन्हें अखाड़े का प्रमुख साल 1998 में चुना गया है.

अखाड़ों की संख्या

इन अखाड़ों की संख्या 7 से बढ़कर आज के वक्त में 13 हो चुकी है. इन अखाड़ों का मिश्रण आपको कुंभ के मेले में देखने या सुनने को जरूर मिल जाएगा. इन अखाड़ों में कुछ शैव्य मान्यता यानी शिव से जुड़ी मान्यताओं को मानते हैं, वहीं कुछ वैष्णव, यानी विष्णु के उपासक हैं. वहीं अन्य उदासानी है.