नई दिल्ली: मुंबई के वकीलों का एक निकाय मंगलवार को उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर करके विशेष सीबीआई न्यायाधीश बी एच लोया की मौत के मामले में दो न्यायाधीशों समेत 11 लोगों से जिरह किये जाने की मांग करेगा. संगठन लोया की कथित रहस्यमय मौत की स्वतंत्र जांच की मांग को लेकर उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर करने वालों में से एक है. वह न्यायाधीश के परिवार के चार सदस्यों से भी जिरह चाहता है. लोया की एक दिसंबर 2014 को मौत हो गई थी. Also Read - Delhi Riots: SC ने फेसबुक इंडिया के VP के खिलाफ 15 अक्टूबर कार्रवाई पर लगाई रोक

प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविल्कर और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की पीठ ने वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे द्वारा इसका मौखिक उल्लेख किये जाने के बाद याचिकाकर्ता को एक आवेदन दाखिल करने की अनुमति दे दी. बांबे लॉयर्स एसोसिएशन की तरफ से उपस्थित दवे ने कहा कि वह कल आवेदन दाखिल करेंगे. Also Read - CBSE Compartment Exam 2020: सुप्रीम कोर्ट ने CBSE, UGC से कहा- छात्रों का कैरियर नुकसान न हो, इसके लिए उठाएं उचित कदम

जिन लोगों से जिरह की मांग की जाएगी उसमें पुणे के प्रमुख जिला न्यायाधीश एस एम मोदक, ग्रेटर मुंबई के नगर दीवानी एवं सत्र अदालत के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश विजय सी बार्डे, राज्य खुफिया विभाग के महानिदेशक संजीव बार्वे, डॉ. प्रशांत बजरंग राठी, निरंजन टाकले और महाराष्ट्र राज्य विधिक सेवा प्राधिकार के सदस्य सचिव श्रीकांत डी कुलकर्णी शामिल हैं. Also Read - सुप्रीम कोर्ट ने कहा- केंद्र सरकार देश की सेक्स वर्कर्स की पहचान पूछे बिना ही...

याचिकाकर्ता डॉ. पिनाक गंगाधर राव और न्यायाधीश लोया के पुत्र, पत्नी, पिता और बहन से भी जिरह की मांग करेगा.

बता दें लोया मुंबई में विशेष सीबीआई अदालत के न्यायाधीश थे. वह सनसनीखेज सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ मामले की सुनवाई कर रहे थे. उनकी नागपुर में मृत्यु हो गई थी. वह एक साथी जज की बेटी की शादी में शरीक होने के लिये नागपुर गए थे.

इस मामले में भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और कुछ वरिष्ठ पुलिस अधिकारी आरोपी थे. शाह और कुछ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को बाद में इस मामले में आरोप मुक्त कर दिया गया था.