जस्टिस लोया की मौत के मामले में महाराष्ट्र सरकार ने आज अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंप दी. महाराष्ट्र सरकार ने विशेष सीबीआई न्यायाधीश बी एच लोया की मौत से संबंधित दस्तावेजों को सीलबंद लिफाफे में कोर्ट में पेश किया. वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने लोया की मौत की जांच की मांग करने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि यह ऐसा मामला है जहां उन्हें (याचिकाकर्ताओं) सब कुछ पता होना चाहिए. 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'गंभीर है जस्टिस बी एच लोया की मौत का मुद्दा'

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, 'गंभीर है जस्टिस बी एच लोया की मौत का मुद्दा'

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महाराष्ट्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि उसके द्वारा पेश की गई कुछ गोपनीय  रिपोर्टों को छोड़कर याचिकाकर्ता अन्य दस्तावेज हासिल कर सकते हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कोई निश्चित तारीख तय किए बिना इस मामले पर सुनवाई के लिए एक हफ्ते बाद का समय दिया. Also Read - महाराष्ट्र में कोरोना से मौतों का आंकड़ा 42 हजार के पार, संक्रमितों की संख्या करीब 16 लाख पहुंची

इस मामले में महाराष्ट्र सरकार की तरफ से मशहूर वकील हरीश साल्वे ने पक्ष रखा. कोर्ट ने महराष्ट्र सरकार को 7 दिनों के अंदर मेडिकल रिपोर्ट सौंपने के भी निर्देश दिए हैं. जज लोया की मौत को लेकर विवाद लगातार जारी है और ये सियासी रंग पकड़ चुका है. विवादों के बीच उनके पुत्र अनुज लोया ने कहा था कि परिवार को उनकी मौत पर कोई संदेह है और वह अलग से जांच नहीं चाहते.

सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जजों ने जो प्रेस कांफ्रेस की थी उसमें भी जज लोया का मामला गूंजा था. एक पत्रकार ने जब पूछा कि विवाद जस्टिस लोया की मौत पर सुनवाई को लेकर भी है, तो उन्होंने कहा था कि हम इससे इनकार नहीं करते. बता दें कि जस्टिस लोया सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस में सुनवाई कर रहे थे.