नई दिल्ली। देश को हिलाकर रख देने वाले निर्भया गैंगरेप केस में सुप्रीम कोर्ट ने चारों दोषियों की फांसी की सजा बरकरार रखी है. सुप्रीम कोर्ट ने चारों दोषियों अक्षय ठाकुर, पवन गुप्ता, मुकेश सिंह और विनय शर्मा को फांसी की सजा बरकरार रखते हुए कहा कि समाज में संदेश देना बहुत जरूरी था. हालांकि बचाव पक्ष कोर्ट से फैसले से असंतुष्ट है. Also Read - SS Rajput death case: महाराष्‍ट्र सरकार ने SC को सौंपा सीलबंद लिफाफा, 11 अगस्‍त को सुनवाई

कोर्ट के फैसले से दोषियों के वकील एपी सिंह ने नाखुशी जताई. सिंह ने कहा कि समाज में संदेश देने के लिए किसी को फांसी नहीं दे सकते. ह्यूमन राइट्स की धज्जियां उड़ गईं. ये देश गांधीजी की अहिंसा मानने वाला देश है. इंसाफ नहीं हुआ है. फैसले की कॉपी पढ़ने के बाद हम रिव्यू पिटिशन दाखिल करेंगे. इस मामले में लोगों के दबाव में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला लिया है. Also Read - सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन से कहा- कुछ इलाकों में 4जी इंटरनेट सेवा बहाल करने की संभावना तलाशें

हम फैसले से खुश: निर्भया की मां Also Read - Sushant Death Case: सुप्रीम कोर्ट में बिहार पुलिस ने कहा- मुंबई पुलिस दे रही रिया का साथ

इस फैसले के बाद निर्भया की मां ने कहा कि उन्हें इस फैसले से खुशी हुई है. कानून के राज में देर है, लेकिन अंधेर नहीं. ये फैसला सिर्फ हमारे लिए नहीं बल्कि पूरे समाज के लिए है. मैं पूरे समाज की आभारी हूं.

क्या कहा जजों ने?

तीन जजों की बेंच ने सर्वसम्मति से ये फैसला लिया. सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि दोषियों द्वारा अंजाम दिए गए गंभीर अपराध की रोशनी में हम सजा को बरकरार रखते हैं. ये एक बर्बरतापूर्ण घटना थी. अदालत को निर्भया कांड में लोगों को सामने मिसाल रखनी थी. निर्भया कांड से लोगों के बीच सदमे की सुनामी दौड़ पड़ी.

दिल्ली हाई कोर्ट ने सुनाई थी सजा  

2014 में दिल्ली हाई कोर्ट ने भी इन्हें मौत की सजा सुनाई थी. हाई कोर्ट ने निचली कोर्ट से मिली फांसी की सजा बरकरार रखी थी जिसे चारों दोषियों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी. करीब साढ़े चार साल पहले हुए इस रेप-हत्याकांड ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था.