नई दिल्ली: जस्टिस रंजन गोगोई बुधवार को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया की शपथ लेंगे. जस्टिस दीपक मिश्रा मंगलवार यानी गांधी जयंती के दिन सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश के पद से रिटायर हो गए. न्यायमूर्ति गोगोई को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद द्वारा शपथ दिलाई जाएगी. जस्टिस रंजन गोगोई देश के 46वें मुख्य न्यायधीश के तौर पर शपथ लेंगे. जस्टिस गोगोई इस पद पर पहुंचने वाले पूर्वोत्‍तर भारत के पहले मुख्‍य न्‍यायाधीश होंगे. गोगोई का कार्यकाल 13 महीने 12 दिन होगा. 1954 में जन्मे गोगोई 1978 में बार काउंसिल में शामिल हुए थे. इसके बाद, 28 फरवरी, 2001 को उन्हें गुवाहाटी हाईकोर्ट का स्थायी जज नियुक्त किया गया. फरवरी, 2011 में वह पंजाब व हरियाणा के हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश बनाए गए. उन्हें पदोन्नति देकर अप्रैल, 2012 में सुप्रीम कोर्ट का जज नियुक्त किया गया.

प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई ने सोमवार को कहा था कि शायद लोग जाति, धर्म और विचारधारा के आधार पर पहले से कहीं अधिक बंटे हुए हैं और क्या पहनना चाहिए, क्या खाएं या क्या कहें, ये सब अब व्यक्तिगत जीवन के बारे में सामान्य सवाल नहीं रह गए हैं . उन्होंने कहा कि संवैधानिक नैतिकता की कसौटी पर मान्यताओं का निरंतर मूल्यांकन होना चाहिए, जब भी कोई संशय या संघर्ष उत्पन्न हो तो संवैधानिक नैतिकता ही अहम होनी चाहिए और संविधान के प्रति यही सच्ची भक्ति है.

मंगलवार को सेवानिवृत्त हुए रहे प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा के सम्मान में सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (एससीबीए) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में न्यायमूर्ति गोगोई ने निवर्तमान सीजेआई के शानदार कैरियर के लिए उनकी प्रशंसा की. न्यायमूर्ति गोगोई ने कहा कि नागरिक स्वतंत्रता के मामले में उनका बहुत अधिक योगदान रहा है और इस संबंध में उन्होंने उनके हाल के फैसलों का विशेष उल्लेख किया.

न्यायमूर्ति गोगोई को बुधवार को प्रधान न्यायाधीश पद की शपथ दिलाई जायेगी. गोगोई ने सोमवार को कहा कि शायद हम जाति, वर्ग और विचाराधारा के आधार पर पहले से कहीं अधिक बंट गये है. हमें क्या पहनना चाहिए, हमें क्या खाना चाहिए,हमें क्या कहना चाहिए, क्या पढ़ना और सोचना चाहिए , हमारी निजी जिंदगी के छोटे और महत्वहीन सवाल नहीं रह गये है.’ उन्होंने कहा,‘हालांकि, भले ही वे हमें पहचान और उद्देश्य देते हैं और हमारे लोकतंत्र की महानता को समृद्ध करते हैं, पर ये वे मुद्दे हैं जो हमें बांटकर विभाजित करते हैं. वे हमें उन लोगों से घृणा करवाते है जो भिन्न हैं.