
Satyam Kumar
सत्यम, बिहार से हैं. LS College से जर्नलिज्म की पढ़ाई की है. पत्रकारिता की उच्चतम शिक्षा जामिया मिल्लिया इस्लामिया से हासिल की है. फिलहाल, लीगल न्यूज के साथ-साथ जनरल नॉलेज ... और पढ़ें
देश के वर्तमान सीजेआई बीआर गवई (CJI BR Gavai) ने अपने उत्तराधिकारी के तौर पर जस्टिस सूर्यकांत (Justice Surya Kant) के नाम की सिफारिश की है. इसके लिए वर्तमान सीजेआई ने केन्द्र सरकार को चिट्ठी भी लिखी है, जिस पर मंजूरी मिलने के बाद सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के अगले चीफ जस्टिस के नाम की अधिकारिक रूप से घोषणा होगी. जस्टिस सूर्यकांत अपने फैसले के चलते हमेशा ही सुर्खियों में रहे हैं. आइये जानते हैं जस्टिस सूर्यकांत के बारे में और उनके वो चार फैसले जिसने पूरे देश को सोचने पर मजबूर किया था.
जस्टिस सूर्यकांत 24 मई 2019 में सुप्रीम कोर्ट जज के रूप में शपथ ली थी. वे 9 फरवरी 2027 में रिटायर होंगे. सुप्रीम कोर्ट जज बनने से पहले जस्टिस सूर्यकांत हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस थे. इस पद पर वे 5 अक्टूबर 2018 से लेकर 23 मई 2019 तक रहे. हिमाचल प्रदेश के चीफ जस्टिस बनने से पहले जस्टिस सूर्यकांत, पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट में जस्टिस के तौर पर कार्यरत थे. वे 2004 में इस हाई कोर्ट में जस्टिस बनाए गए थे.
न्यायिक सेवा में जज के रूप में जस्टिस सूर्यकांत को दो दशक से अधिक का अनुभव है. सुप्रीम कोर्ट में रहने के दौरान वे कई अहम मामलों में बेंच का हिस्सा रहे. जस्टिस सूर्यकांत ने ही पंजाब में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM Modi) की सुरक्षा में हुई चूक के मामले में सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जस्टिस इंदु मल्होत्रा की अगुवाई वाली पांच सदस्यीय कमेटी गठित की थी. जस्टिस जम्मू एंड कश्मीर से आर्टिकल 370 को हटाने वाली बेंच के भी हिस्सा थे.
रणवीर इलाहाबादिया की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस सूर्यकांत ने कड़ी आपत्ति जताई थी. सुनवाई के दौरान जस्टिस सूर्यकांत ने कहा था कि इस व्यक्ति के दिमाग में कुछ ऐसा गंदा है जो समाज में फैल गया है, और वह माता-पिता का भी अपमान कर रहा है. उन्होंने रणबीर अल्हाबादिया से पूछा कि ऐसे बयान के बाद अदालत उसे राहत क्यों दें? जस्टिस ने इलाहाबदिया को चेताते हुए कहा था कि लोकप्रियता किसी को सामाजिक मर्यादाएं तोड़ने का अधिकार नहीं देती.
नूपुर शर्मा मामला: इस मामले में भी जस्टिस सूर्यकांत ने कहा था कि सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों को अपने शब्दों के असर को समझना चाहिए, क्योंकि एक गलत बयान समाज में बड़ा विभाजन पैदा कर सकता है. नूपुर शर्मा के प्रोफेट मोहम्मद के बारे में दिए बयान के बाद से देश भर में उनके खिलाफ जगह-जगह पर प्रदर्शन हो रहा था. जस्टिस सूर्यकांत ने इस प्रदर्शनों की जिम्मेदार नूपुर शर्मा को ही ठहराया था.
स्वाति मालीवाल के साथ CM हाउस में हुए घटना के वक्त भी जस्टिस सूर्यकांत की टिप्पणी पूरे देश में वायरल हुई थी. जस्टिस सूर्यकांत ने स्वाती मालीवाल के साथ हुए हादसे को लेकर कहा था कि यह सीएम हाउस है या गुंड्डों का अड्डा. जस्टिस सूर्यकांत ने आरोपी विभव कुमार से पूछा कि क्या उसे एक महिला के साथ ऐसा करने में शर्म नहीं आई.
मोहम्मद जुबैर से जुड़े मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि किसी नागरिक को अपने विचार व्यक्त करने से रोकना असंवैधानिक है. सोशल मीडिया पर उसे अपनी बात रखने से रोकना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का उल्लंघन होगा. जस्टिस सूर्यकांत की इन टिप्पणियों से पता चलता है कि नागरिकों के मौलिक अधिकारों को लेकर कितने तत्पर है और लोगों को किन दायरों में रहकर अपने विचार रखने चाहिए.
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